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Union Budget 2026: ओल्ड और न्यू टैक्स सिस्टम में होंगे बदलाव? टैक्सपेयर्स को मिलेगी राहत या बढ़ेगा बोझ; जानें पूरी उम्मीदें

Union Budget 2026: जैसे-जैसे यूनियन बजट 2026 नजदीक आ रहा है. भारत की पुरानी और नई इनकम टैक्स व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है. सैलरी पाने वाले और मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स ज़्यादा छूट और एक आसान टैक्स सिस्टम के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे है.

By: Mohammad Nematullah | Published: January 24, 2026 10:56:50 PM IST



Union Budget 2026: जैसे-जैसे यूनियन बजट 2026 नजदीक आ रहा है. भारत की पुरानी और नई इनकम टैक्स व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है. सैलरी पाने वाले और मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स ज़्यादा छूट और एक आसान टैक्स सिस्टम के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे है. साथ ही वे ऐसे बदलावों की भी मांग कर रहे है जो सभी इनकम ग्रुप्स के लिए टैक्सेशन को ज़्यादा न्यायसंगत और व्यावहारिक बनाएं.

पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत कटौतियां

पुरानी टैक्स प्रणाली उन लोगों के लिए आकर्षक है जिनके पास होम लोन, बीमा पॉलिसी और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट है. यह कई कटौतियां प्रदान करती है जो टैक्सेबल इनकम को कम करने में मदद करती है. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत प्रोविडेंट फंड योगदान, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम्स (ELSS), और जीवन बीमा प्रीमियम जैसे इन्वेस्टमेंट पर 1.5 लाख तक की कटौती की अनुमति है.

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धारा 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा के लिए अतिरिक्त राहत उपलब्ध है, धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर कटौती, और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) पर छूट मिलती है. सैलरी पाने वाले टैक्सपेयर्स को लगभग 50,000 की स्टैंडर्ड कटौती का भी लाभ मिलता है.

नई टैक्स व्यवस्था में अधिकांश छूटें खत्म

NPV एंड एसोसिएट्स LLP के डायरेक्ट टैक्स विशेषज्ञ अक्षय जैन का कहना है कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत पुरानी टैक्स व्यवस्था उन टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद है जिनके पास स्ट्रक्चर्ड इन्वेस्टमेंट, हाउसिंग लोन और योग्य कटौतियां है. जबकि नई व्यवस्था में टैक्स स्लैब कम हैं, इसने अधिकांश छूटों और कटौतियों को खत्म कर दिया है.

टैक्सपेयर्स पुरानी व्यवस्था को क्यों पसंद करते?

जैन ने कहा कि पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले टैक्सपेयर्स धारा 80C के तहत होम लोन के मूलधन पर 2 लाख तक की कटौती, इन्वेस्टमेंट पर 1.5 लाख तक की कटौती, और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) योगदान पर 50,000 की अतिरिक्त कटौती का दावा कर सकते है. उन्होंने आगे कहा, “मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में बढ़ते किराए को देखते हुए, HRA छूट सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए कहीं ज़्यादा फायदेमंद है.” उन्होंने यह भी कहा कि पुरानी व्यवस्था उन लोगों के लिए अभी भी प्रासंगिक है जिन्होंने अपने फाइनेंस, बीमा और रिटायरमेंट इन्वेस्टमेंट की योजना बनाई है.

नई टैक्स व्यवस्था में कम राहत

धारा 115BAC के तहत नई टैक्स व्यवस्था कम टैक्स दरें और लगभग 75,000 की स्टैंडर्ड कटौती प्रदान करती है. हालांकि यह सेक्शन 80C और 80D, HRA, और LTA के तहत कटौती की अनुमति नहीं देता है. यह स्टैंडर्ड डिडक्शन, NPS में एम्प्लॉयर के योगदान, और कुछ चुनिंदा रिटायरमेंट से संबंधित छूट तक सीमित है. इसलिए बजट में नई टैक्स व्यवस्था में इनमें से कुछ छूटों को शामिल करने की मांग होगी.

बजट 2026 से क्या उम्मीद करें?

मैक्सिओम वेल्थ के फाउंडर और CEO राम मेदुरी ने कहा कि 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब को बढ़ाया जाना चाहिए, दरों को आसान बनाया जाना चाहिए, और संभवत स्लैब को महंगाई से जोड़ा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय सैलरी धीरे-धीरे बढ़ती हैं, लेकिन टैक्स स्लैब लंबे समय तक अपरिवर्तित रहते है. जिससे समय के साथ टैक्स का बोझ धीरे-धीरे बढ़ता है. उन्होंने कहा कि इंडेक्सेशन सिस्टम इसे और ज़्यादा न्यायसंगत बना सकता है.

नांगिया ग्लोबल के डायरेक्टर संजय कुमार ने कहा कि पुरानी व्यवस्था बचत, बीमा और घर खरीदने को प्रोत्साहित करती है, जबकि नई व्यवस्था की सादगी ने इसे स्वीकार्यता दिलाने में मदद की है. दोनों में से चुनना चुनौतीपूर्ण है. इसलिए कुछ निर्णायक बदलाव किए जाने चाहिए.

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