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यात्रा में सामान खोने पर घबराएं नहीं, घर बैठे e-RCT पोर्टल पर रेलवे से मांगे मुआवजा; यहां जानें कैसे करें आवेदन

Railway e-RCT System: इंडियन रेलवे ने अपने सिस्टम को पूरी तरह से हाई-टेक बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. अब यात्रियों को ट्रेन एक्सीडेंट चोरी या सामान खोने से जुड़े क्लेम के लिए महीनों इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा.

By: Mohammad Nematullah | Published: March 1, 2026 6:40:24 PM IST



Railway e-RCT System: इंडियन रेलवे ने अपने सिस्टम को पूरी तरह से हाई-टेक बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है. अब यात्रियों को ट्रेन एक्सीडेंट चोरी या सामान खोने से जुड़े क्लेम के लिए महीनों इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा. रेलवे ने e-RCT (इलेक्ट्रॉनिक रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल) सिस्टम शुरू किया है, जिससे क्लेम का पूरा प्रोसेस उनकी उंगलियों पर हो जाएगा.

e-RCT क्या है?

e-RCT एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो पेपरवर्क के पुराने और मुश्किल सिस्टम को खत्म कर देगा. अब तक यात्रियों को अपना बकाया पाने के लिए फिजिकल फाइलें जमा करनी पड़ती थीं और ट्रिब्यूनल के चक्कर लगाने पड़ते थे. लेकिन इस नए ऑनलाइन सिस्टम के आने से क्लेम फाइल करने से लेकर फैसला सुनाने तक सब कुछ कंप्यूटर या मोबाइल फोन के जरिए आसानी से हो जाएगा.

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इन मामलों में ऑनलाइन मिलेगा मुआवजा

इस पोर्टल के जरिए यात्री कई तरह के क्लेम के लिए क्लेम करने के हकदार है:

  • ट्रेन लॉस से जुड़े गंभीर मामले.
  • यात्रा के दौरान सामान का खो जाना या चोरी हो जाना है.
  • टिकट रिफंड से जुड़े विवाद है.
  • रेलवे की लापरवाही से होने वाली दूसरी दिक्कत है.

आसान क्लेम फाइलिंग प्रोसेस 

  • नए सिस्टम में स्टेप-बाय-स्टेप गाइड है ताकि आम आदमी को अप्लाई करने में कोई दिक्कत न हो:
  • आप देश के किसी भी कोने से पोर्टल पर लॉग इन करके अपना केस फाइल कर सकते है.
  • फॉर्म भरते समय सिस्टम अपने आप बता देगा कि कौन से डॉक्यूमेंट्स चाहिए, जिससे कोई गलती नहीं होगी.
  • जैसे ही आप अपना क्लेम सबमिट करेंगे, सॉफ्टवेयर उसे तुरंत संबंधित ऑफिसर को फॉरवर्ड कर देगा, जिससे इंसानी गलती की गुंजाइश खत्म हो जाएगी.

हियरिंग वीडियो कॉल से होगी

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी इसका ई-हियरिंग फीचर है. अब आपको गवाही या हियरिंग के लिए ट्रिब्यूनल ऑफिस जाने की मजबूरी नहीं होगी. आप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जज और वकील से बात कर सकते है. इससे न सिर्फ पैसेंजर का समय बचेगा बल्कि कानूनी खर्च भी कम होगा. आप अपने केस का स्टेटस लाइव ट्रैक कर सकते हैं ताकि देख सकें कि आपकी फाइल अभी किस टेबल पर है.

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