Mesh Sankranti 2026 Kab Hai: संक्रांति का पर्व हर महीने मनाया जाता है. इसका मतलब है कि साल में 12 संक्रांति मनाई जाती है. संक्रांति के पर्व का संबंध ग्रहों के राजा सूर्य देव से माना जाता है. संक्रांति सूर्य देव के एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश करने पर मनाई जाती है. संक्रांति के पर्व के दिन गंगा समेत सभी पावन नदियों में स्नान-दान किया जाता है. इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.
क्या कहती हैं धार्मिक मान्यता?
धार्मिक मान्यता है कि संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान और फिर सूर्य पूजन से सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तो मेष संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. हालांकि, इस साल लोगों के मन में तारीख को लेकर संशय बना हुआ है. मेष संक्रांति का पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं, इस पर्व की सही तारीख, पुण्य और महापुण्य काल का समय और पूजा विधि.
कब है मेष संक्रांति?
मेष संक्रांति का पर्व इस साल 14 अप्रैल यानी कल मनाया जाएगा. सूर्य कल सुबह 9:38 मिनट पर मंगल राशि में एंट्री करने जा रहे हैं. यह मेष संक्रांति का क्षण होगा. इसी समय खरमास का समापन होगा. कल नए सौर वर्ष की शुरुआत होगी, साथ ही बैसाखी का पर्व भी मनाया जाएगा.
पुण्य और महापुण्य काल का समय
- पुण्य काल सुबह 5 बजकर 57 मिनट से दोपहर को 1 बजकर 55 मिनट तक
- महापुण्य काल सुबह 7 बजकर 30 मिनट से 11 बजकर 47 मिनट तक
जब बैसाखी के दिन हुआ भीषण नरसंहार, पूरे देश में पसरा मातम; रूह कंपा देगा जलियांवाला बाग हत्याकांड
मेष संक्रांति पर पूजा विधि
- मेष संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर लें.
- फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें. (लाल फूल, चावल और कुमकुम)
- ॐ सूर्याय नमः या ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप
- आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें.
- मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं.
- जरूरतमंद लोगों को अन्न और वस्त्र आदि का दान करें.