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IAS Resignation Rules: IAS बनना ही नहीं, नौकरी छोड़ना भी है सबसे मुश्किल! जानें क्या कहते हैं नियम?

IAS Resignation Rules: आईएएस के पद को देश में काफी प्रतिष्ठित पद माना जाता है. इस नौकरी को हासिल करने में सालों लग जाते हैं. लेकिन आज हम बताने वाले हैं कि , यह नौकरी पाने से ज्यादा मुश्किल इसे छोड़ना है.

By: Preeti Rajput | Published: March 29, 2026 1:06:05 PM IST



IAS Resignation Rules: IAS ऑफिसर की नौकरी छोड़ना उतना ही मुश्किल है, जितना इस पद को हासिल करना. एक IAS को इस्तीफा देने के बाद लंबी प्रक्रिया, जांच और मंजूरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. कई बार इस्तीफा सालों तक लटका रहता है. नियमों के तहत सरकार इस इस्तीफे को रोक भी सकती है, जिससे अधिकारी तुरंत नौकरी नहीं छोड़ पाते हैं. आईएएस के पद को देश में काफी प्रतिष्ठित पद माना जाता है. इस नौकरी को हासिल करने में सालों लग जाते हैं. लेकिन आज हम बताने वाले हैं कि , यह नौकरी पाने से ज्यादा मुश्किल इसे छोड़ना है. 

 IAS की नौकरी को छोड़ना है बेहद मुश्किल 

दरअसल, IAS जैसी प्रतिष्ठित नौकरी को छोड़ना सुनने में जितना आसान लगता है, उतना होता नहीं है, एक IAS अधिकारी सिर्फ इस्तीफा देकर सेवा नहीं छोड़ सकता है, बल्कि इसके लिए लंबी प्रक्रिया, जांच औरकई स्तरों से गुजरना पड़ता है. कई बार तो इस्तीफा मंजूर होने में सालों लग जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आखिर IAS की नौकरी छोड़ना इतना मुश्किल क्यों है?

IAS अधिकारी कन्नन गोपीनाथन केस 

दरअसल, साल 2012 बैच के IAS अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने साल 2019 में कश्मीर में अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदियों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. लेकिन हैरानी की बात है कि उनका उस्तीफा करीब 6 साल बाद भी स्वीकार नहीं हुआ है. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर उनके इस्तीफे पर रोक लगा रही है. जिसके कारण केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सोशल मीडिया पर संबोधित करते हुए उसे उत्पीड़न बताया है. 

राजनीति में भाग लेने के क्या है नियम?

कन्नन गोपीनाथन ने अगस्त 2019 में इस्तीफा दिया था. जब जम्मू और कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के बाद कई पाबंदियां लगाई गई थीं. फिर अक्टूबर 2025 में उन्होंने कांग्रेस जॉइन की और उन्हें केरल की पलक्कड़ सीट से उम्मीदवार बनाने की चर्चा खूब जोरों पर थी. लेकिन नियम कहते हैं कि कोई सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ सकता है. 

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अब तक नहीं मंजूर हुआ इस्तीफा

साल 2014 में संशोधित All India Services (Conduct) Rules के अनुसार,  हर सरकारी कर्मचारी को राजनीतिक रूप से निष्पक्ष रहना जरूरी है. संविधान के सर्वोच्चता बनाए रखना भी उसकी जिम्मेदारी होती है. क्योंकि गोपीनाथन का इस्तीफा अब तक मंजूर नहीं किया गया है. इसलिए अभी भी वह एक सरकारी अधिकारी है. 

IAS अधिकारी कैसे देते हैं इस्तीफा?

दरअसल, आईएएस (IAS) अधिकारियों का इस्तीफा All India Services (Death-cum-Retirement Benefits) Rules, 1958 के तहत दिया जाता है. अगर कोई अधिकारी अपने स्टेट कैडर में काम कर रहा है, तो वह अपना इस्तीफा राज्य के चीफ सेक्रेटरी को सौंप सकता है. वहीं अगर वह केंद्र में प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर है, तो उसे संबंधित मंत्रालय के सचिव को इस्तीफा देना होता है. कन्नन गोपीनाथन AGMUT कैडर थे, इसलिए उनका मामला गृह मंत्रालय के जरिए आगे बढ़ता है. इसके बाद संबंधित राज्य और केंद्र सरकार मिलकर इसकी जांच करते हैं. अंत में DoPT (Department of Personnel and Training) को भेजते हैं, जहां अतिम फैसला लिया जाता है. वहीं IAS अधिकारियों के इस्तीफे पर अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री लेते हैं. 

इस्तीफे के बाद की प्रक्रिया

इस्तीफा मिलने के बाद सबसे पहले जांच होती है कि अधिकारी पर कोई जांच या भ्रष्टाचार का मामला तो नहीं है. अगर ऐसा कुछ होता है, तो इस्तीफा खारिज कर दिया जाता है. इसके बाद राज्य सरकार अपनी रिपोर्ट और सिफारिश केंद्र को भेजती है. इसके अलावा यह भी देखा जाता है कि ट्रेनिंग या स्कॉलरशिप के बदले सरकार के साथ कोई बॉन्ड तो नहीं साइन किया है. अगर अधिकारी समय से पहले इस्तीफा देता है, तो उसे जुर्माना भरना होता है. 

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