Medicine Price Hike: आने वाले दिनों में लोगों की जेब पर भार पड़ने वाला है क्योंकि 1 अप्रैल से जरूरी दवाओं जैसे दर्द निवारक, एंटीबायोटिक और एंटी-इंफेक्टिव दवाओं की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी होगी. ये बढ़ोतरी नेशनल एसेंशियल दवाओं की लिस्ट (NLEM) में शामिल दवाओं के लिए होलसेल प्राइस इडेक्स (WPI) में सालाना बदलाव के अनुसार 0.6% तय की गई है.
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के आर्थिक सलाहकार के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में होलसेल प्राइस इडेक्स (WPI) में सालाना बदलाव 0.64956% रहा. इसी हिसाब से नेशनल एसेंशियल दवाओं की लिस्ट की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग 0.65% होगी.
कौन-कौन सी दवाएं होगी महंगी?
समायोजित कीमतें NLEM में सूचीबद्ध 1,000 से ज्यादा दवाओं को कवर करेंगी. दी गई लिस्ट के अनुसार पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक जैसे अजिथ्रोमाइसिन (बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए) शामिल हैं. एंटी-एनीमिया दवाएं, विटामिन और खनिज भी इस लिस्ट में हैं. साथ ही मध्यम से गंभीर COVID-19 रोगियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं और स्टेरॉइड भी शामिल हैं. इनकी कीमतों में बदलाव साल में केवल एक बार ही किया जाता है.
कीमत बढ़ने के पीछे की वजह
फार्मा इंडस्ट्री के एक अधिकारी के अनुसार, ‘ईरान युद्ध के कारण कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे इंडस्ट्री के मुनाफे पर दबाव है.’ इंडस्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ मेन दवा घटक (APIs) और सॉल्वेंट्स की कीमतें काफी बढ़ गई हैं और ये मामूली वृद्धि इसमें मदद नहीं करेगी.
एक फार्मा इंडस्ट्री समूह के प्रतिनिधि ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि सिरप और अन्य द्रव दवाओं में इस्तेमाल होने वाली ग्लिसरीन, प्रोपलीन ग्लाइकोल और सॉल्वेंट्स बहुत महंगी हो गई हैं. इसके अलावा, अन्य बीच की सामग्रियों (इंटरमीडिएट्स) की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं. इस वजह से उन्हें दवाओं की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी की जरूरत है और वे ये मामला NPPA के सामने रखेंगे.