Politics: 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने बड़ा राजनीतिक दांव खेला है. जेडीयू के वरिष्ठ नेता रहे केसी त्यागी और उनके बेटे अम्बरीष त्यागी ने पार्टी का दामन थाम लिया है. RLD अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने दोनों नेताओं को औपचारिक रूप से शामिल कराया.
चुनाव से पहले बड़ा सियासी संदेश
इस शामिलीकरण को आगामी यूपी चुनाव के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. केसी त्यागी के लंबे राजनीतिक अनुभव से पार्टी को रणनीतिक मजबूती मिलने की उम्मीद है, जबकि अम्बरीष त्यागी के आने से युवाओं के बीच RLD की पकड़ बढ़ाने की कोशिश दिख रही है.
जेडीयू से दूरी के मिल रहे थे संकेत
दरअसल, केसी त्यागी के जेडीयू छोड़ने की चर्चा कई दिनों से चल रही थी. उन्होंने 16 तारीख को साफ संकेत दे दिया था कि उन्होंने सदस्यता अभियान के दौरान अपनी सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया. इसके बाद से ही उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं.
नीतीश कुमार पर बयान बना टर्निंग पॉइंट
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि इसी साल 9 जनवरी को त्यागी द्वारा नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग के बाद पार्टी के भीतर मतभेद उभर आए थे. जेडीयू की ओर से इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई थी, जिससे उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती नजर आई.
जेडीयू के संस्थापक नेताओं में रहा अहम रोल
केसी त्यागी जेडीयू के गठन के समय से ही प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं. 2003 में समता पार्टी और जनता दल के विलय के दौरान जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव और नीतीश कुमार के साथ उन्हें पार्टी का मजबूत स्तंभ माना जाता था. उन्होंने लंबे समय तक प्रधान महासचिव के रूप में संगठन को मजबूत किया.
पश्चिमी यूपी में समीकरण बदलने की कोशिश
अब उनका RLD में शामिल होना सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि 2027 यूपी चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नई राजनीतिक समीकरणों का संकेत माना जा रहा है. खासकर जाट और किसान वोट बैंक को साधने में RLD इस कदम को बड़े फायदे के तौर पर देख रही है.