Climate change: जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सीधे लोगों की सेहत और जीवनशैली को प्रभावित कर रहा है. बढ़ती गर्मी के कारण लोग धीरे-धीरे फिजिकल एक्टिविटी से दूर हो रहे हैं, जो भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है.
मौसम का बदला मिजाज
पहले जहां हर मौसम का अपना तय समय होता था, वहीं अब साल के अधिकतर महीनों में गर्मी का असर महसूस किया जा रहा है. इस बदलाव ने लोगों की दिनचर्या और बाहर की गतिविधियों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है.
रिसर्च ने बढ़ाई चिंता
‘द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ’ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, लोगों की शारीरिक सक्रियता घटती जाएगी. 156 देशों के डेटा के विश्लेषण में पाया गया कि 27.8 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान होने पर फिजिकल एक्टिविटी में गिरावट आने लगती है.
भारत के लिए ज्यादा खतरा
भारत जैसे गर्म देशों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है. यहां पहले से ही ज्यादा गर्मी और उमस रहती है, ऐसे में आने वाले वर्षों में लोगों का बाहर निकलना और व्यायाम करना कम हो सकता है. अनुमान है कि 2050 तक देश में फिजिकल इनएक्टिविटी करीब 2 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी.
बीमारियों का बढ़ेगा खतरा
एक्सरसाइज में कमी के कारण दिल की बीमारियां, टाइप-2 डायबिटीज, कैंसर और मानसिक समस्याओं का खतरा तेजी से बढ़ सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फिजिकल इनएक्टिविटी के कारण हर एक लाख लोगों पर 10 से ज्यादा मौतों का जोखिम हो सकता है.
शहरों की बढ़ती मुश्किलें
बढ़ती गर्मी के साथ-साथ शहरों में कंक्रीट का विस्तार और हरियाली की कमी ने स्थिति को और खराब कर दिया है. दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे लोगों के लिए फिजिकल एक्टिविटी के विकल्प सीमित हो रहे हैं.
क्या हो सकता है समाधान?
डाक्टरों का कहना है कि अब फिजिकल एक्टिविटी को ‘लाइफस्टाइल चॉइस’ नहीं, बल्कि जरूरी आदत के रूप में अपनाना होगा. शहरों में छायादार रास्ते, अर्बन फॉरेस्ट, कूलिंग सेंटर और किफायती जिम जैसी सुविधाएं विकसित करनी होंगी.