Delhi LPG Cylinder: दिल्ली में LPG गैस सिलेंडर की किल्लत ने लोगों को नए विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है. ऐसे में डीजल के चूल्हे, खासकर कन्वेक्टर-आधारित स्टोव, एक बार फिर इस्तेमाल में आने लगे हैं. पहले भले ही ये पुराने जमाने का विकल्प माने जाते थे, लेकिन मौजूदा हालात में ये काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं.
होटल-रेस्टोरेंट पर बड़ा असर
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी का सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों पर पड़ा है. गैस न मिलने की वजह से उनका काम प्रभावित हो रहा है. इसी कारण अब वे डीजल भट्टियों और इंडक्शन चूल्हों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं ताकि कारोबार चलता रहे.
दिल्ली में डीजल चूल्हों की मांग इतनी बढ़ गई है कि आसपास के शहरों, जैसे सोनीपत, के होटल मालिक भी यहां खरीदारी करने पहुंच रहे हैं. उनका कहना है कि गैस की कमी में काम चलाने के लिए यह एक जरूरी विकल्प बन गया है.
कीमत भी बनी अहम फैक्टर
डीजल चूल्हों की कीमत 5,000 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक है. यह कीमत कई छोटे कारोबारियों और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए किफायती साबित हो रही है, खासकर तब जब गैस की उपलब्धता अनिश्चित हो.
घरेलू उपभोक्ता भी परेशान
बड़े परिवारों को गैस सिलेंडर की बुकिंग में देरी से काफी परेशानी हो रही है. ऐसे में वे भी डीजल स्टोव जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, ताकि रोजमर्रा के काम बिना रुकावट के चलते रहें.
फैक्ट्रियों में बढ़ी हलचल
बल्लीमारान और अन्य इलाकों में डीजल भट्टियां बनाने वाली फैक्ट्रियों में काम तेजी से बढ़ गया है. कारीगरों के मुताबिक, उन्हें लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं और उत्पादन बढ़ाना पड़ रहा है. गैस संकट से पहले जहां सालभर में लगभग 10 डीजल भट्टियों की मांग होती थी, वहीं अब सिर्फ दो दिनों में ही 100 से ज्यादा ऑर्डर आ चुके हैं. यह बदलाव बाजार की तेजी से बदलती जरूरतों को दर्शाता है.
एडवांस पेमेंट देने को तैयार ग्राहक
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि ग्राहक डीजल भट्टियों के लिए एडवांस पेमेंट करने को भी तैयार हैं. इससे साफ है कि लोग किसी भी हाल में अपने काम को जारी रखना चाहते हैं. LPG गैस की किल्लत ने डीजल चूल्हों को फिर से लोकप्रिय बना दिया है. यह विकल्प न केवल कारोबारियों बल्कि आम लोगों के लिए भी राहत का जरिया बन रहा है.