Home > देश > SC Adoptive Mother Leave Verdict: अब बच्चा गोद लेने वाली महिला को भी मिलेगी मैटरनिटी लीव, आ गया ‘सुप्रीम’ फैसला

SC Adoptive Mother Leave Verdict: अब बच्चा गोद लेने वाली महिला को भी मिलेगी मैटरनिटी लीव, आ गया ‘सुप्रीम’ फैसला

SC Adoptive Mother Leave Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने मातृत्व संरक्षण को मौलिक मानवाधिकार बताते हुआ कहा कि बच्चे के जन्म के तरीके के आधार पर इसे छीना नहीं जा सकता.

By: JP Yadav | Last Updated: March 17, 2026 4:31:27 PM IST



SC Adoptive Mother Leave Verdict: ‘बच्चे गोद लेने वाली महिला को भी मैटरनिटी लीव का हक होगा’ सुप्रीम कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला मंगलवार (17 मार्च, 2026) को सुनाया. इसके साथ ही अपनी टिप्पणी में सर्वोच्च अदालत ने सोशल सिक्युरिटी कोड 2020 की धारा 60(4) को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि गोद लेने वाली महिला को भी अब 3 महीने से ज्यादा का अवकाश प्रदान किया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि गोद लेने वाली मां को 12 हफ्ते की छुट्टी पर उम्र की शर्त लगाना भी गलत है. कोर्ट ने कहा कि यह शर्त लगाना समानता के अधिकार का उल्लंघन है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और आर. महादेवन की बेंच ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए यह अहम टिप्पणी की है. 

सुप्रीम कोर्ट ने मातृत्व संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि मातृत्व संरक्षण एक मौलिक मानवाधिकार है. ऐसे में बच्चे के जन्म के तरीके के आधार पर मां से यह छीना नहीं जा सकता है. इसके साथ ही कोर्ट ने सामाजिक सुरक्षा संहिता की उस धारा को असंवैधानिक करार दिया है, जिसमें सिर्फ 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर अवकाश की अनुमति देने की बात कही गई है. 

महिला को मातृत्व अवकाश से नहीं किया जा सकता वंचित 

सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले के दौरान टिप्पणी में कहा कि तीन महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को मातृत्व अवकाश से वंचित करना समानता के अधिकार का भी उल्लंघन है. कोर्ट ने कहा कि मातृत्व संरक्षण एक मूलभूत मानवाधिकार है. ऐसे में परिवार बनाने के एक ‘गोद लिया हुआ बच्चा’ और ‘जैविक बच्चा’ कानून की नजर में समान हैं. जाहिर है कि दोनों को एक समान नजरिये से देखते हुए गोद लेने वाली महिला को इससे वंचित नहीं किया जा सकता है. 

मातृत्व लाभ का मकसद सिर्फ जन्म नहीं, देखभाल भी

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि गोद लेने वाली सभी मांएं समान स्थिति में हैं  तो उम्र के आधार पर भेदभाव करना अनुचित है. गोद लेने में भावनात्मक और मानसिक बदलाव अहम होता है. बच्चे की उम्र चाहे जो हो मां का समय देना जरूरी है.

Advertisement