Israel-Iran War Escalates: दुनिया के दो चर्चित देशों में अब गर्मागर्म का माहौल बन गया है. अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर कड़े हमले किए हैं, जिनमें राष्ट्रपति भवन, खुफिया एजेंसियों और सैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया. ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु शक्ति बनने नहीं देगा. वहीं, ईरान ने भी जवाबी हमला किया है. ये संघर्ष धीरे-धीरे एक बड़े युद्ध में बदलने की संभावना दिखा रहा है, जिसका असर न सिर्फ खाड़ी देशों बल्कि भारत समेत पूरे विश्व पर पड़ सकता है.
कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव
इस युद्ध की सबसे सीधे असर वाली चीजों में से एक है कच्चे तेल की कीमत. दुनिया का लगभग 40% कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आता है, जो ईरान के कंट्रोल में है. यदि ये मार्ग बंद होता है, तो वैश्विक तेल सप्लाई में बड़ा संकट पैदा हो सकता है. भारत, चीन और अन्य एशियाई देश इसी मार्ग से तेल आयात करते हैं, इसलिए किसी भी बाधा का असर महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीधे पड़ सकता है.
भारत के लिए आयात जोखिम
तेल पर निर्भरता: भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 85-90% आयात करता है.
होर्मुज का महत्व: इस जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है, जिसमें खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर मेन हैं.
भारत का आयात: हाल के आंकड़ों के अनुसार भारत ने इस साल खाड़ी देशों से करीब 2.6 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल का आयात किया है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है.
महंगाई और आर्थिक दबाव
तेल की बढ़ती कीमतें भारत में महंगाई को तेज कर सकती हैं. इसके अलावा, तेल आयात बिल बढ़ने से चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा से माल ढुलाई, बीमा लागत और सप्लाई में कमी होगी, जिससे भारत की तेल आयात लागत में भारी वृद्धि होगी.
रणनीतिक संतुलन की चुनौती
अगर देखा जाए तो भारत के लिए ये समय बहुत खतरे वाला हो सकता है. अमेरिका और इजराइल रणनीतिक साझेदार हैं, जबकि ईरान के साथ भी ऐतिहासिक और ऊर्जा संबंध रहे हैं. इस जटिल स्थिति में किसी एक का पक्ष लेना भारत की संतुलित छवि को प्रभावित कर सकता है.