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sim binding rules: व्हाट्सएप यूजर्स हो जाएं तैयार, जानें 1 मार्च से क्या होगा आपके फोन पर, बदलने वाले हैं यह नियम

sim binding rules: केंद्र सरकार ने सिम बाइंडिंग नियम लागू करने की डेडलाइन बढ़ाने से साफ मना कर दिया है. 1 मार्च 2026 से नए नियमों के तहत मैसेजिंग एप तभी काम करेंगे जब रजिस्टर्ड सिम उसी फोन में मौजूद हो.

By: Ranjana Sharma | Published: February 27, 2026 10:30:42 PM IST



sim binding rules:  केंद्र सरकार ने ‘सिम बाइंडिंग’ नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की डेडलाइन बढ़ाने से साफ मना कर दिया है. नए नियमों के तहत अगर आपके मोबाइल में रजिस्टर्ड सिम नहीं होगा, तो वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मैसेजिंग एप काम नहीं करेंगे. साथ ही, कंप्यूटर पर लॉगिन किए गए वॉट्सएप अकाउंट 6 घंटे के भीतर ऑटो-लॉगआउट हो जाएंगे. सरकार का दावा है कि यह कदम साइबर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े को रोकने में मदद करेगा.

सिम बाइंडिंग क्या है?

सिम बाइंडिंग एक सुरक्षा प्रणाली है, जो आपके मैसेजिंग एप को आपके फोन में मौजूद रजिस्टर्ड सिम के साथ जोड़ देती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी हैकर या ठग आपके नंबर का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएगा.

नया नियम

1 मार्च 2026 से यह लागू होगा. इसका मतलब है कि कोई भी एप तभी खुलेगा जब रजिस्टर्ड सिम उसी फोन में मौजूद होगा.

सरकार ने डेडलाइन बढ़ाने से क्यों इंकार किया?

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि नियमों को मानने की समय-सीमा बढ़ाने पर कोई विचार नहीं किया जाएगा. उनका कहना है कि यह नियम राष्ट्रीय सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू किए गए हैं. सुरक्षा के मामले में सरकार किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी.

1 मार्च से यूजर्स को क्या करना होगा?

यूजर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस नंबर पर उनका मैसेजिंग एप है, वह सिम उसी फोन में लगी हो. अगर सिम कार्ड बाहर निकाला गया, तो एप काम करना बंद कर देगा.

टेक कंपनियों और इंडस्ट्री का रुख

इंडस्ट्री एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि हर 6 घंटे में लॉगआउट करने का नियम पेशेवरों के लिए परेशानी पैदा करेगा. साथ ही, जिन यूजर्स ने एक ही अकाउंट साझा किया है, उनके लिए भी यह चुनौती होगी. केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक कंपनियों को 120 दिनों के भीतर इस नियम के पालन पर रिपोर्ट देनी होगी. नियम न मानने पर टेलीकॉम एक्ट 2023 और साइबर सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी.

स्टारलिंक लॉन्चिंग

सिंधिया ने बताया कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवा ‘स्टारलिंक’ ने अभी तक सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के सामने आवश्यक डेमो पूरा नहीं किया है. कंपनी को दिखाना होगा कि वह भारतीय सीमाओं के बाहर इंटरनेट एक्सेस बंद कर सकती है और जरूरत पड़ने पर नेटवर्क पर नियंत्रण दे सकती है.

बीएसएनएल अधिकारी मामला

हाल ही में बीएसएनएल डायरेक्टर के प्रयागराज दौरे के दौरान 50 कर्मचारियों का इंतजाम करने का आदेश वायरल हुआ. सिंधिया ने कहा कि इस मामले में ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल फिलहाल आर्थिक रूप से बेहतर कर रही है और स्वस्थ कैश फ्लो जेनरेट कर रही है.

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