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Health News: थायरॉइड क्या है और यह हमारे शरीर को कैसे प्रभावित करता है? जानें इसके लक्षण

Health news: थायरॉइड हार्मोन असंतुलन शरीर की चयापचय, वजन, ऊर्जा और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है. हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण पहचानकर समय पर निदान और उपचार जरूरी है. दवा, सर्जरी, जीवनशैली बदलाव और आहार प्रबंधन थायरॉइड स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं.

By: Ranjana Sharma | Published: February 22, 2026 9:45:09 AM IST



Health news: थायरॉइड शरीर की एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण ग्रंथि है जो गले के सामने स्थित होती है. यह थायरॉक्सिन और ट्राईआयोडोथायरोनिन हार्मोन का उत्पादन करती है, जो शरीर के चयापचय, ऊर्जा स्तर, वजन, मनोदशा और हृदय स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है. हार्मोन असंतुलन होने पर शरीर में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव दिखाई दे सकते हैं.

हाइपरथायरायडिज्म और हाइपोथायरायडिज्म क्या हैं?

थायरॉइड असंतुलन मुख्यतः दो प्रकार का होता है. हाइपरथायरायडिज्म में हार्मोन का स्तर अधिक होता है, जिससे चयापचय तेज हो जाता है, वजन घटता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और बेचैनी, नींद में कठिनाई और पसीना अधिक आता है. वहीं, हाइपोथायरायडिज्म में हार्मोन कम होता है, जिससे चयापचय धीमा होता है और वजन बढ़ता है, थकान, ठंड लगना, बाल झड़ना, सूखी त्वचा और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं सामने आती हैं.

शुरुआती लक्षण और संकेत

थायरॉइड समस्या धीरे-धीरे या कभी-कभी तेजी से विकसित होती है. शुरुआती संकेतों में वजन में बदलाव, थकान, ऊर्जा की कमी, दिल की धड़कन में असामान्यता, बालों का झड़ना, त्वचा की सूखापन और मूड में बदलाव शामिल हैं. समय पर पहचान और उपचार न होने पर ये लक्षण गंभीर रूप ले सकते हैं.

कारण और जोखिम 

थायरॉइड असंतुलन के प्रमुख कारणों में ऑटोइम्यून रोग जैसे ग्रेव्स और हाशिमोटो थायरॉइडिटिस, आयोडीन की कमी या अधिकता, पारिवारिक इतिहास, अस्वास्थ्यकर जीवनशैली, धूम्रपान और तनाव शामिल हैं. महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक प्रभावित होती हैं.

उपचार और जांच

थायरॉइड का निदान सरल रक्त जांच से किया जाता है जिसमें TSH, T3 और T4 हार्मोन की जाँच होती है. कभी-कभी अल्ट्रासाउंड या थायरॉइड स्कैन भी किया जाता है. जांच के बाद डॉक्टर हार्मोन असंतुलन की गंभीरता और प्रकार के आधार पर उपचार तय करते हैं. उपचार में दवा और मेडिकल थेरेपी, सर्जरी और रेडियोधर्मी थेरेपी शामिल हैं. हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉक्सिन सप्लीमेंट और हाइपरथायरायडिज्म में एंटी-थायरॉइड दवाओं का प्रयोग किया जाता है. गंभीर मामलों में थायरॉइड ग्रंथि का आंशिक या पूर्ण ऑपरेशन या रेडियोधर्मी थेरेपी की जाती है.

खाने का रखें ध्यान 

आयोडीन युक्त आहार जैसे समुद्री मछली, अंडा और दूध लाभकारी हैं. हरी सब्जियां, फल और प्रोटीन से भरपूर संतुलित पोषण शरीर की ऊर्जा और चयापचय बनाए रखने में मदद करता है. योग और ध्यान तनाव कम करने और मेटाबॉलिज्म संतुलित करने में सहायक हैं. नियमित व्यायाम वजन और ऊर्जा नियंत्रित करने में मदद करता है. धूम्रपान और अत्यधिक कैफीन से बचना आवश्यक है.

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