Home > देश > EPS‑95 minimum pension: प्राइवेट कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? इतने रुपये तक बढ़ सकती है EPS‑95 पेंशन

EPS‑95 minimum pension: प्राइवेट कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? इतने रुपये तक बढ़ सकती है EPS‑95 पेंशन

EPS 95 minimum pension: मजदूर यूनियन ने ईपीएस‑95 के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये करने की मांग की है. सरकार ने एक्चुअरी हिसाब लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. वर्तमान में अधिकतम पेंशन लगभग 7,500 रुपये है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कुछ कर्मचारियों को 9,000 रुपये या उससे अधिक पेंशन मिल रही है.

By: Ranjana Sharma | Published: February 19, 2026 10:04:59 PM IST



EPS 95 minimum pension: प्राइवेट कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ के माध्यम से मिलने वाली पेंशन योजना यानी ईपीएस‑95 एक बार फिर चर्चा में है. मजदूर यूनियनों ने मांग की है कि इस योजना के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन मौजूदा 1,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रति माह की जाए. यह मुद्दा संसद और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है और इसे लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस शुरू हो गई है.

ईपीएस‑95 योजना क्या है?

ईपीएस‑95 निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बनाई गई सरकारी पेंशन योजना है. इसमें कर्मचारी अपने वेतन का एक हिस्सा ईपीएस में जमा करते हैं, जबकि नियोक्ता के योगदान का 8.33 प्रतिशत पेंशन फंड में जाता है. इसके अतिरिक्त सरकार 15,000 रुपये तक की सैलरी पर 1.16 प्रतिशत राशि पेंशन फंड में जोड़ती है. कर्मचारी यदि कम से कम 10 वर्ष तक नौकरी करते हैं, तो 58 वर्ष की उम्र से मासिक पेंशन मिलना शुरू हो जाती है. वर्तमान में इस पेंशन पर महंगाई के अनुसार कोई स्वतः वृद्धि नहीं होती.

वर्तमान में कितनी हैं न्यूनतम पेंशन

ईपीएस‑95 के तहत मिलने वाली पेंशन कर्मचारी की सैलरी और कुल सेवा के सालों पर निर्भर करती है. वर्तमान में न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये प्रति माह है. यह राशि सरकार की ओर से गारंटीड होती है, यानी अगर कर्मचारी का योगदान इससे कम पेंशन देता है, तो सरकार अंतर की राशि जोड़कर न्यूनतम 1,000 रुपये पेंशन सुनिश्चित करती है.

पेंशन मिलने की शर्तें और नियम

अधिकतम पेंशन कर्मचारी की अधिकतम पेंशन योग्य वेतन सीमा और सेवा के कुल वर्षों पर आधारित होती है. वर्तमान नियमों के अनुसार, अधिकतम पेंशन लगभग 7,500 रुपये प्रति माह है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कई कर्मचारियों ने अपनी वास्तविक सैलरी के आधार पर ईपीएस में योगदान करने का विकल्प चुना, जिससे अब कुछ कर्मचारियों को 7,500 रुपये से अधिक पेंशन मिल रही है. कुछ मामलों में पेंशन 9,000 रुपये या उससे अधिक भी पहुंच रही है.

मजदूर यूनियन का तर्क

मजदूर यूनियन का तर्क है कि मौजूदा न्यूनतम पेंशन बहुत कम है और इसे बढ़ाना आवश्यक है ताकि रिटायर्ड कर्मचारियों की जीवन स्तर में सुधार हो. सरकार ने इस मुद्दे पर एक्चुअरी का हिसाब लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि यह देखा जा सके कि न्यूनतम पेंशन को 9,000 रुपये तक बढ़ाना कितनी वित्तीय रूप से संभव है. यदि न्यूनतम पेंशन बढ़ती है, तो इससे लाखों प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों और उनके परिवारों को फायदा होगा. 

Advertisement