Falgun Amavasya: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की अमावस्या का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि यह दिन पितरों की शांति, तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. साल भर में आने वाली 12 अमावस्या तिथियों में फाल्गुन मास की अमावस्या को विशेष महत्व प्राप्त है, क्योंकि यह वर्ष की अंतिम अमावस्या मानी जाती है.
पितृ कार्यों के लिए सर्वोत्तम
शास्त्रों के अनुसार अमावस्या तिथि पितृ कार्यों के लिए सर्वोत्तम समय मानी गई है.इस दिन श्रद्धालु स्नान, तर्पण और पिंडदान कर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए तर्पण और दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.
ऐसे करें पूजा
धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, फाल्गुन अमावस्या के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए. इसके बाद सूर्य को अर्घ्य देकर पितरों के नाम से जल अर्पित किया जाता है. कई लोग इस दिन व्रत रखकर जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान भी करते हैं. ब्राह्मणों को भोजन कराने और कौओं को अन्न देने की भी परंपरा है, जिसे पितरों तक अर्पण का प्रतीक माना जाता है.
पितृ दोष के लिए करें ये उपाय
ज्योतिष मान्यता के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष हो, तो अमावस्या के दिन विशेष उपाय करना लाभकारी माना जाता है. विशेषकर फाल्गुन मास की अमावस्या पर किए गए उपायों से मानसिक शांति और पारिवारिक सुख में वृद्धि होने की मान्यता है. धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि अमावस्या के दिन संयम, सत्य और सदाचार का पालन करना चाहिए. व्रत के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है.
कब है फाल्गुन अमावस्या
17 फरवरी को पड़ रही फाल्गुन अमावस्या पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और आत्मिक शुद्धि का महत्वपूर्ण अवसर है. श्रद्धा और विधि के साथ किए गए कर्म न केवल पितरों की शांति के लिए, बल्कि परिवार की समृद्धि और सुख-शांति के लिए भी शुभ माने जाते हैं.