Surya puja vidhi: हिंदू धर्म में सूर्य देव को साक्षात ऊर्जा और जीवन का स्रोत माना गया है. शास्त्रों में बताया गया है कि नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने से आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. ज्योतिष में भी सूर्य देव को आत्मा, पिता और मान-सम्मान का कारक माना गया है. लेकिन कई बार श्रद्धा के बावजूद लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता.
सही समय पर अर्घ्य न देना
सूर्य को अर्घ्य देने का सबसे उत्तम समय सूर्योदय का माना गया है. कई लोग देर से उठकर तेज धूप में अर्घ्य देते हैं, जो शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं माना जाता. कोशिश करें कि सूर्य की पहली किरण के समय ही अर्घ्य दें.
सीधे सूर्य को घूरना
कुछ लोग अर्घ्य देते समय सीधे सूर्य की ओर लगातार देखते रहते हैं. इससे आंखों को नुकसान हो सकता है. परंपरा के अनुसार जल की धारा के बीच से सूर्य को देखना शुभ माना गया है.
तांबे के पात्र की जगह किसी भी बर्तन का उपयोग
धार्मिक मान्यता के अनुसार तांबे के लोटे से अर्घ्य देना शुभ माना गया है. स्टील या प्लास्टिक के बर्तन का उपयोग करने से पूजा की शुद्धता प्रभावित मानी जाती है. तांबा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला धातु माना गया है.
बिना मंत्र के अर्घ्य देना
अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना गया है. कई लोग केवल जल चढ़ाकर वापस आ जाते हैं. मंत्रोच्चारण से पूजा की ऊर्जा और प्रभाव बढ़ता है.
गंदे स्थान या बिना स्नान के अर्घ्य देना
सूर्य पूजा से पहले स्नान करना और साफ स्थान पर खड़े होकर अर्घ्य देना जरूरी माना गया है. बिना स्नान या गंदे स्थान पर अर्घ्य देने से पूजा की पवित्रता कम हो जाती है.
सही विधि ही सूर्य आराधना का मूल मंत्र
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य को नियमित अर्घ्य देने से आत्मबल, स्वास्थ्य और सफलता में वृद्धि होती है. यदि इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो पूजा का सकारात्मक प्रभाव अधिक मिलता है. श्रद्धा के साथ सही विधि अपनाना ही सूर्य आराधना का मूल मंत्र है.