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आप भी तो नहीं चलाते ये गाड़ियां, दिल्ली की सड़कों पर उतरते ही हो जाएंगी सीज; घर से निकलने से पहले जरूर पढ़ें डिटेल

2025 में दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों पर नियम बदले गए हैं. अब केवल उम्र नहीं, बल्कि इन आधार पर गाड़ियों को बदला जाएगा. जब्ती पर रोक है, एनओसी समय सीमा हटी है और मालिकों को ट्रांसफर, स्क्रैप या बदलाव के ऑप्शन दिए गए हैं.

By: sanskritij jaipuria | Last Updated: February 15, 2026 11:16:03 AM IST



साल 2025 के अंत तक दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों को लेकर नियमों में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं. पहले केवल गाड़ी की उम्र के आधार पर सख्ती की जा रही थी, लेकिन अब जोर उत्सर्जन मानकों (एमिशन स्टैंडर्ड) पर दिया जा रहा है. पहले 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन अपने आप ‘एंड-ऑफ-लाइफ’ माने जाते थे. अब Supreme Court of India ने साफ किया है कि कार्रवाई खासतौर पर उन वाहनों पर केंद्रित होगी जो बीएस-IV से नीचे के उत्सर्जन मानकों के हैं और तय उम्र सीमा पार कर चुके हैं.

इसका मतलब है कि केवल उम्र ही एकमात्र आधार नहीं होगी, बल्कि ये भी देखा जाएगा कि वाहन कितना प्रदूषण फैला रहा है.

 जब्ती की कार्रवाई पर रोक

अगस्त 2025 में लोगों की शिकायतों के बाद बिना नोटिस के गाड़ियों को जब्त करने की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी गई. अदालत ने कहा कि सभी पुराने वाहनों को तुरंत जब्त करना सही नहीं है. इस मामले की आगे समीक्षा की जा रही है.

 एनओसी नियम में राहत

Delhi Transport Department ने एक अहम बदलाव किया है. पहले तय समय के अंदर ही एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेना जरूरी था, लेकिन अब एक साल की समय सीमा हटा दी गई है. अब वाहन मालिक कभी भी एनओसी लेकर अपनी गाड़ी को दूसरे राज्य में दोबारा रजिस्टर करा सकते हैं.

 2024 में हुई सख्ती

2024 के अंत में दिल्ली सरकार ने पुराने वाहनों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया था. उस समय हजारों गाड़ियों को जब्त किया गया था. बाद में 2025 में नियमों में बदलाव और स्पष्टीकरण के बाद कुछ राहत दी गई.

 वाहन मालिकों के लिए ऑप्शन

अगर आपकी गाड़ी तय उम्र पार कर चुकी है, तो आपके पास ये ऑप्शन हो सकते हैं:

 1. एनओसी लेकर दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन- आप एनओसी लेकर अपनी गाड़ी को एनसीआर से बाहर किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर कर सकते हैं.

 2. स्वेच्छा से स्क्रैप कराना- सरकार द्वारा अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर वाहन को जमा कराया जा सकता है.

 3. इलेक्ट्रिक किट में बदलाव- कुछ मामलों में पेट्रोल या डीजल गाड़ी को इलेक्ट्रिक किट के जरिए बदला जा सकता है, लेकिन ये प्रक्रिया तकनीकी रूप से जटिल और खर्चीली हो सकती है.

 जरूरी सलाह

नियमों में समय-समय पर बदलाव हो रहे हैं. इसलिए वाहन मालिकों को चाहिए कि वे समय-समय पर Delhi Transport Department की ताजा अधिसूचनाएं जरूर देखें. प्रदूषण की स्थिति और लोगों की प्रतिक्रिया के अनुसार नीतियों में आगे भी बदलाव हो सकता है.

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