Maha Tirtharaj: विश्व की इकलौती जगह जहां पर एक नहीं दो नहीं तीन नहीं, बल्कि पांच नदियों का संगम होता है. यह जगह कहीं और नहीं बल्कि भारत के उत्तर प्रदेश के जालौन जिले इटावा-औरैया सीमा के पास में स्थित है. इसे पंचनद (Pachnad) के नाम से जाना जाता है.
इस स्थान को को दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान माना जाता है, जहां पांच नदियां – यमुना, चंबल, सिंध, पहुज और कुंवारी – आपस में मिलती हैं. हमारे पुराणों में ‘महा तीर्थराज’ कहा गया है, जहां महाभारत काल से जुड़े कालेश्वर महादेव मंदिर और मुचकुंद महाराज के मंदिर स्थित हैं.
पंचनद महा तीर्थराज-
इस जगह पर पांच नदियां जैसे गंगा यमुना, चंबल, सिंध, पहुज और कुंवारी का संगम होता है.यह जगह उत्तर प्रदेश के जालौन, इटावा के पास स्थित है, जो मध्य प्रदेश के भिंड जिले के पास लगता है.
पौराणिक महत्व
माना जाता है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां, इस जगह पर आकर ठहरे थे और मुचकुंद महाराज ने यहां इसी स्थान पर तपस्या की थी. साथ ही यह भी माना जाता है कि इसे प्रयागराज से भी अधिक पवित्र माना जाता है, जिसे ‘महा तीर्थराज’ की संज्ञा दी गई है. इसी वजह से इस स्थान को महा तीर्थराज कहा जाता है क्योंकि यहां पर पांच नदियों का संगम होता है.
यह दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां इतनी नदियां एक साथ मिलती हैं.
श्रीमद् देवी भागवत पुराण के पंचम स्कंध के अध्याय में श्लोक के माध्यम से पंचनद का जिक्र किया गया है. इस स्थान से जुड़ी पौराणिक कथा के मुताबिक, महिषासुर के पिता रम्भ तथा चाचा करम्भ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पंचनद पर आकर तपस्या की थी.
महाभारत में भी पंचनद का जिक्र किया गया है. कथा के मुताबिक, महाभारत युद्ध खत्म होने के बाद पांडू पुत्र नकुल ने पंचनद क्षेत्र पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की थी. विष्णु पुराण में भी पंचनद का विवरण है. पंचनद तीर्थ क्षेत्र में कालेश्वर महादेव का मंदिर भी है.
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