Bank Strike Today: अगर आज आपको बैंक ब्रांच के बाहर ताला लटका दिखे या काउंटर खाली मिले, तो इसकी वजह कोई तकनीकी खराबी या सामान्य छुट्टी नहीं है. देशभर में आज सरकारी बैंकों में कामकाज ठप है. स्टमर पासबुक की जगह मोबाइल ऐप देखते नजर आ रहे हैं. इसके पीछे बैंक कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रहा एक पुराना विवाद है, जो अब हड़ताल के रूप में बदल गया है.
आज पब्लिक सेक्टर के बैंकों के कर्मचारी नेशनवाइड हड़ताल पर हैं. इस वजह से बैंक शाखाओं से जुड़ी सेवाएं प्रभावित हुई हैं. ये हड़ताल ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही छुट्टियों का सिलसिला चल रहा था, जिससे लगातार तीन दिन बैंकिंग सेवाएं बाधित हो गईं. इस हड़ताल का मेन कारण बैंकों में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू न होना है, जिसकी मांग कर्मचारी लंबे समय से कर रहे हैं.
बैंक कर्मचारी क्या मांग कर रहे हैं?
बैंक यूनियनों का कहना है कि बैंकों में भी अन्य सरकारी दफ्तरों की तरह सप्ताह में केवल पांच दिन काम होना चाहिए. अभी बैंकों में पहला, तीसरा और पांचवां शनिवार कामकाजी होता है, जबकि दूसरा और चौथा शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है. इससे कर्मचारियों को अधिकतर हफ्तों में छह दिन काम करना पड़ता है.
यूनियनों का दावा है कि अगर शनिवार को छुट्टी दी जाती है, तो कर्मचारी सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट ज्यादा काम करने को तैयार हैं, ताकि कामकाज पर कोई असर न पड़े.
समझौता होने के बाद भी लागू क्यों नहीं हुआ फैसला?
मार्च 2024 में वेतन संशोधन की बातचीत के दौरान बैंक यूनियन और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के बीच सभी शनिवार छुट्टी करने पर सहमति बनी थी. लेकिन ये फैसला अब तक लागू नहीं हुआ. इसी देरी से नाराज होकर यूनियनों ने हड़ताल का रास्ता चुना.
किन बैंकों पर पड़ा हड़ताल का असर?
इस हड़ताल का असर मेन रूप से सरकारी बैंकों पर पड़ा है. इनमें शामिल हैं:
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
बैंक ऑफ बड़ौदा
बैंक ऑफ इंडिया
इन बैंकों की ब्रांच में आज कामकाज नहीं हुआ या बहुत सीमित रहा. वहीं, बड़े निजी बैंक जैसे HDFC बैंक, ICICI बैंक, Axis बैंक और Kotak Mahindra बैंक पर इस हड़ताल का खास असर नहीं पड़ा है.
बातचीत क्यों नहीं बन पाई?
हड़ताल से पहले चीफ लेबर कमिश्नर की मौजूदगी में 21 और 22 जनवरी को बातचीत हुई थी, लेकिन यूनियनों को अपनी मांग पर कोई साफ आश्वासन नहीं मिला. इसके बाद यूनियनों ने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया.
भले ही आज बैंक ब्रांच बंद हैं, लेकिन डिजिटल सेवाएं चालू रहीं. कस्टमर इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर पा रहे हैं, जैसे- ATM और कैश जमा मशीन, UPI भुगतान,मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग, लेकिन चेक क्लियरेंस, KYC अपडेट, नकद जमा और अन्य शाखा से जुड़ी सेवाओं में देरी हुई.
आगे क्या?
बैंक यूनियनों का कहना है कि उनकी मांग सिर्फ कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि बेहतर बैंकिंग सिस्टम के लिए है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाती है और क्या आने वाले दिनों में कोई समाधान निकलता है.