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सुरों की थी रानी फिर भी चुना ओशो का रास्ता, दौलत और शौहरत में नहीं मिल रहा था सुकून; जानें रेखा की पूरी कहानी

Rekha Bhardwaj Spritual Journey: सिंगर रेखा भारद्वाज अपनी शानदार परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती हैं. एक इंटरव्यू के दौरान रेखा ने आध्यात्मिकता में अपनी यात्रा और कैसे उन्हें ओशो में शांति मिली के बारे में पूरी कहानी बताई थी.

By: Preeti Rajput | Last Updated: January 23, 2026 11:55:13 AM IST



Rekha Bhardwaj Spritual Journey: भारतीय सिनेमा में नेशनल अवॉर्ड विनर सिंगर रेखा भारद्वाज अपनी शानदार परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती हैं. उन्होंने अपनी सिंगिंग से कई पीढ़ियों के दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया है. उनकी आवाज का काफी गहरा प्रभाव है. जिसने कई लोगों को उनके आध्यात्मिक रास्ते पर गाइड किया है. रेखा ने कई बार अपनी म्यूज़िकल यात्रा के बारे में जिक्र किया. 

ओशो की ओर एक अंदरूनी खिंचाव

शुभंकर मिश्रा के साथ एक इंटरव्यू के दौरान रेखा ने आध्यात्मिकता में अपनी यात्रा और कैसे उन्हें ओशो में शांति मिली के बारे में पूरी कहानी बताई थी. उन्होंने बताया कि प्यार, जिंदगी और करियर में सफलता के बावजूद उन्हें ओशो की ओर एक अंदरूनी खिंचाव महसूस किया. उन्होंने कहा कि “हां, मैं प्यार, जिंदगी और अपने करियर में काफी सफल थी. लेकिन इसके बावजूद वह ओशो की तरफ आकर्षित हो गईं. क्या विनोद खन्ना ने अपने करियर के चरम पर सब कुछ छोड़कर ओशो के पास नहीं चले गए थे?” रेखा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि गहरे अर्थ की तलाश मुश्किलों के न होने पर भी हो सकती है.

आध्यात्मिक यात्रा की कहानी 

रेखा ने बताया कि उनकी पहचान अक्सर विशाल भारद्वाज की पत्नी होने से जुड़ी थी, जिससे उन्हें अपनी व्यक्तिगत पहचान की तलाश हुई. उन्होंने कहा, “मुझे विशाल भारद्वाज की पत्नी के रूप में जाना जाता था और मुझे अपनी व्यक्तिगत पहचान के बारे में पक्का नहीं था. संगीत के लिए एक चाहत थी, और मैं उस पड़ाव तक पहुंची, लेकिन फिर, हमेशा कुछ और होता है जिसकी आप तलाश कर रहे होते हैं, है ना?” 

किन मुश्किलों का करना पड़ा सामना? 

रेखा ने अपनी मुश्किलों के बारे में जिक्र करते बताया कि कैसे सबसे अच्छे पल भी उदासी से भरे हो सकते हैं. जैसा कि उन्होंने कहा कि “जब आपके पास जिंदगी में सब कुछ होता है. आप परफेक्ट समय या फिर प्रियजनों के साथ काम करते थे. तब भी कई बार उदासी उन्हें घेर लेती हैं. कुछ ऐसा होता है जो आपको अलग लेवल पर प्रभावित करता है. क्योंकि कोई भी सफर एक जैसे नहीं हो सकता.” ओशो मेडिट्रेश स्कूल के साथ उनके जुड़ाव की बारीकियों के बारे में उनकी समझ को और भी गहरा किया. उन्होंने आगे कहा “मैंने सीखा कि अहंकार क्या है. जलन को मन में रखना कितना आसान है और अपनी समस्याओं के लिए दूसरों को दोष देना कितना आसान है. 

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