Fatty Liver in Children: फैटी लिवर की बीमारी को कभी सिर्फ़ शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल गए है. आज यह समस्या छोटे बच्चों में भी देखी जा रही है. रिसर्च से पता चलता है कि लगभग 10% बच्चे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) से प्रभावित है. सवाल यह है कि ऐसा क्यों हो रहा है?
बच्चों के खाने में छिपा जहर
हमें लगता है कि हम अपने बच्चों को अनाज, दही या ग्रेनोला बार खिलाकर उन्हें हेल्दी बना रहे हैं, लेकिन सच तो यह है कि इनमें अक्सर हाई-फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप होता है. जो एक मीठा जहर है. एक बार खाने के बाद यह सीधे लिवर में जाता है और फैट में बदल जाता है. धीरे-धीरे, लिवर इंसुलिन हार्मोन पर रिस्पॉन्ड करना बंद कर देता है, जिससे शुगर को प्रोसेस करना मुश्किल हो जाता है.
शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना बहुत जरूरी
जब लिवर पर ज़्यादा दबाव पड़ता है, तो बच्चों को थकान महसूस हो सकती है. कभी-कभी खाने के तुरंत बाद नींद या कमज़ोरी महसूस होती है. गर्दन पर काले धब्बे भी इसका एक संकेत हो सकते है. अगर समय पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो बच्चों को बाद में डायबिटीज, PCOS, थायराइड की समस्या और दूसरी हार्मोनल समस्याएं हो सकती है.
फैटी लिवर की बीमारी से बचने के आसान तरीके
पैकेज्ड जूस से बचें: अपने बच्चों को बोतल वाले जूस के बजाय असली फल दें. असली फलों में फाइबर और नेचुरल शुगर होती है, जो हेल्दी होते है.
फाइबर से भरपूर खाना दें: साबुत अनाज, सब्ज़ियां और दालें अपने बच्चों की डाइट का हिस्सा बनाएं. फाइबर ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और भूख को नियंत्रित करने में मदद करता है.
हेल्दी खाने की आदतें डालें: हर दो घंटे में बार-बार स्नैक्स देने के बजाय, पौष्टिक और संतुलित डाइट पर ध्यान दें.
जागरूकता क्यों जरूरी है?
दुर्भाग्य से कई डॉक्टर फैटी लिवर जैसी गंभीर समस्याओं को शुरुआती स्टेज में नजरअंदाज कर देते है. इसीलिए परिवारों और माता-पिता को सतर्क रहने की जरूरत है. अगर हम आज से ही बच्चों की खाने की आदतों में सुधार करते हैं, तो हम उन्हें भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचा सकते है.