Home > लाइफस्टाइल > Explainer: डायबिटीज मरीज भी अब मिठास का ले सकेंगे पूरा मजा; क्या है ये नेचुरल शुगर? जानें पूरी जानकारी…

Explainer: डायबिटीज मरीज भी अब मिठास का ले सकेंगे पूरा मजा; क्या है ये नेचुरल शुगर? जानें पूरी जानकारी…

Tagatose Natural Sugar: साइंटिस्ट्स ने टैगाटोज बनाने का एक बहुत असरदार तरीका बनाया है. यह एक कम कैलोरी वाली नैचुरल शुगर है जो इंसुलिन लेवल नहीं बढाती.

By: Preeti Rajput | Published: January 18, 2026 10:58:04 AM IST



Tagatose Natural Sugar: साइंटिस्ट्स ने एक बहुत कम मिलने वाली नैचुरल शुगर की पहचान की है जिसका स्वाद लगभग रेगुलर शुगर जैसा ही होता है, इसमें कैलोरी कम होती है, और इससे इंसुलिन लेवल में अचानक बढोतरी नहीं होती. यह खोज टेबल शुगर और आर्टिफिशियल स्वीटनर दोनों का एक हेल्दी ऑप्शन दे सकती है.

क्या है टैगाटोज ?

टैगाटोज सुक्रोज जितनी लगभग 92 परसेंट मीठी होती है लेकिन इसमें सिर्फ एक-तिहाई कैलोरी होती है. आम शुगर और कई आर्टिफिशियल सब्स्टिट्यूट के उलट, टैगाटोज का ब्लड ग्लूकोज लेवल पर बहुत कम असर होता है, जिससे यह डायबिटीज या इंसुलिन सेंसिटिविटी वाले लोगों के लिए एक अच्छा ऑप्शन बन जाता है.

साइंटिस्ट्स ने की खोज

टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने, बायोटेक्नोलॉजी फर्म मानुस बायो (US) और केकट एंजाइमेटिक (इंडिया) के साथ मिलकर, बडे पैमाने पर टैगाटोज बनाने का एक नया और ज्यादा असरदार तरीका दिखाया है. टैगाटोज नैचुरली फलों और डेयरी प्रोडक्ट्स में कम मात्रा में पाया जाता है, लेकिन इसकी कम अवेलेबिलिटी ने इसके कमर्शियल इस्तेमाल को रोक दिया है. अभी के प्रोडक्शन के तरीके महंगे और इनएफिशिएंट हैं.

साधारण शुगर और टैगाटोज में अंतर 

  • स्वाद: टैगाटोज़ एक मीठा स्वाद देता है जो सुक्रोज़ जितना लगभग 90–92% मीठा होता है. इसे अक्सर बिना किसी कड़वे आफ्टरटेस्ट या ठंडक देने वाले असर के बताया जाता है, जो चीनी के फ्लेवर प्रोफ़ाइल जैसा ही होता है.
  • टेक्सचर और बेकिंग: यह खाना पकाने में लगभग चीनी जैसा ही काम करता है. गर्म करने पर यह ब्राउन (कैरामलाइज़) हो जाता है और बेक्ड चीज़ों में वैसा ही वॉल्यूम और टेक्सचर देता है.
  • मेल्टिंग पॉइंट: इसका मेल्टिंग पॉइंट 134 °C होता है.

टैगाटोज के फायदें 

  • कैलोरी: इसमें सुक्रोज की सिर्फ़ 38% कैलोरी (लगभग 1.5 kcal/g) होती है.
  • ब्लड शुगर: इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI 3) बहुत कम होता है, जिससे ब्लड ग्लूकोज़ और इंसुलिन लेवल पर बहुत कम असर पड़ता है.
  • डेंटल हेल्थ: यह नॉन-कैरियोजेनिक है, मतलब इससे कैविटी नहीं होती और यह दांतों की सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया को बढ़ने से भी रोक सकता है.

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