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सतुआ बाबा का नया अवतार! करोड़ों की Defender-Porsche छोड़, बुलडोजर पर निकाली सवारी…

Magh Mela 2026: प्रयागराज के संगम में माघ मेले में मकर संक्रांति स्नान पर्व बेहद धूमधाम के साथ मनाया गया. इस दौरान सतुआ बाबा और सुमेरुपीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती में समर्थकों के साथ गंगा स्नान किया. सतुआ बाबा इस दौरान एकता का संदेश भी दिया.

By: Preeti Rajput | Published: January 16, 2026 8:21:12 AM IST



Magh Mela 2026: उत्तर-प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले में मकर संक्रांति का स्नान पर्व के दौरान श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ा. इस दौरानलाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंचे. गंगा और यमुना और सरस्वती के संगम पर इस दिन स्नान करने से पुण्य का लाभ प्राप्त होता है. इस समय माघ मेले में सबसे चर्चित संत सतुआ बाबा ने भी संतों के साथ स्नान किया. इसके अलावा वह इस दौरान बुलडोजर पर घूमते हुए नजर आए. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. 

बुलडोजर पर घूमते नजर आए सतुआ बाबा 

सतुआ बाबा ने संगम में पहुंचकर श्रद्धालुओं के साथ हाल चाल जाना और उनकी कुशलता के बारे में पूछी. सन्ना के दौरान, उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मीय बातचीत की. सतुआ बाबा का यह सरल व्यवहार श्रद्धालुओं को खूब पसंद आया. उन्होंने मकर संक्रांति के मौके पर सभी को शुभकामनाएं दी. सतुआ बाब ने कहा कि एक रहोगे तो ही नेक रहोगे. उन्होंने कहा कि समाज और देश की मजबूती के लिए बेहद जरुरी है. उन्होंने संगम तट पर मौजूद श्रद्धालुओं से गंभीरता के साथ बातचीत की. साधु संतों और श्रद्धालुओं के बीच सतुआ बाबा की मौजूदगी इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है. 

संगम तट पर श्रद्धालुओं की भीड़

माघ मेले में सुमेरुपीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती भी अपने समर्थकों के साथ गंगा स्नान किया. उन्होंने संगम में विधिवत स्नान कर देश की सुख शांति की कामना की. गंगा स्नान के बाद उन्होंने कहा कि मां गंगा के बाद उन्होंने कहा कि मां गंगा में स्नान करने से अदृश्य शक्तियां मिलती है. शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि माघ मेले और मकर संक्राति का धार्मिक महत्व होता है. इस अवसर पर गंगा स्नान करने से मन और आत्मा को खूब शांति मिलती है. उन्होंने कल्याण की कामना करते हुए कहा कि देश में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे. मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर संगम तट पर खूब भीड़ देखने को मिली. ठंड के बावजूद आस्था की डुबकी लगाने लाखों लोग संगम तट पर पहुंचे. संतों औऱ महात्माओं की मौजूदगी ने धार्मिक गरिमा को और बढ़ा दिया. संगम तट पर  श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्था की गई थी.पर्व को लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे. 

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