Home > विदेश > न कोई तारीख मिली न हुई सुनवाई, ट्रंप टैरिफ को लेकर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने नहीं सुनाया कोई फैसला; जानें क्यों?

न कोई तारीख मिली न हुई सुनवाई, ट्रंप टैरिफ को लेकर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने नहीं सुनाया कोई फैसला; जानें क्यों?

Trump Tariff: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ की वैधता पर कोई फैसला नहीं सुनाया.

By: Sohail Rahman | Last Updated: January 14, 2026 10:51:18 PM IST



US Supreme Court on Trump Tariff: अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर एक अहम कानूनी लड़ाई अभी भी सुलझी नहीं है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ की वैधता पर कोई फैसला नहीं सुनाया. कोर्ट ने दूसरी बार अपना फैसला टाल दिया है, जिससे सरकार, इंडस्ट्री और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदार बेसब्री से नतीजे का इंतजार कर रहे हैं. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से आज इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ पर अपनी राय जारी करने की उम्मीद थी.

फिलहाल भविष्य में किसी फैसले की कोई तारीख तय नहीं है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह फैसला अमेरिकी व्यापार नीति को नया रूप दे सकता है, जिसमें प्रमुख व्यापारिक भागीदारों पर टैरिफ लगाना और वैश्विक व्यापार को बाधित करना शामिल है.इसके अलावा, घरेलू स्तर पर भी यह तय करेगा कि राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां अर्थव्यवस्था में कितनी दूर तक बढ़ सकती हैं.

ट्रंप ने कब की थी टैरिफ की घोषणा? (When did Trump announce the tariffs?)

कोर्ट की राय “पारस्परिक टैरिफ” फ्रेमवर्क पर केंद्रित है, जिसकी घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल 2025 में की थी. इसके तहत वाशिंगटन ने अधिकांश देशों से आयात पर 10 प्रतिशत का बेसलाइन टैरिफ पेश किया, यह उपाय 5 अप्रैल से शुरू होने वाला था. प्रशासन ने उन देशों के एक समूह के लिए उच्च पारस्परिक दरों की दूसरी परत भी पेश की, जिनके बारे में उसने कहा था कि उनमें सबसे अधिक “गैर-पारस्परिक” व्यापार बाधाएं हैं, उन देश-विशिष्ट दरों में सूचीबद्ध समूह के आधार पर लगभग 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई और यह 9 अप्रैल से प्रभावी होने वाला था.

भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ कुल 50 प्रतिशत है, जिसमें 2 अप्रैल को घोषित 25 प्रतिशत का पारस्परिक टैरिफ और रूस के साथ भारत के लगातार तेल व्यापार से जुड़ा अतिरिक्त 25 प्रतिशत का सेकेंडरी टैरिफ शामिल है.

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अगली सुनवाई कब होगी? (When will the next hearing be?)

इससे पहले, 9 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने इस बारे में कोई साफ संकेत नहीं दिया है कि अगली सुनवाई कब होगी या फैसला कब सुनाया जाएगा. बुधवार को कोर्ट ने तीन अन्य मामलों में फैसले सुनाए, लेकिन टैरिफ से जुड़े इस संवेदनशील मामले में न तो कोई बहस हुई और न ही कोई डेडलाइन तय की गई.

सुनवाई में राष्ट्रपति की शक्तियों के दायरे पर फोकस होगा (The hearing will focus on the scope of the president’s powers)

यह मामला इस सवाल के इर्द-गिर्द घूमता है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के लगभग सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर एकतरफा 10 से 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर अपनी संवैधानिक और कानूनी शक्तियों की सीमा पार की है. ट्रंप प्रशासन ने इन टैरिफ को लागू करने के लिए 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल किया, जिसमें बढ़ते अमेरिकी व्यापार घाटे और फेंटानिल जैसी अवैध दवाओं की तस्करी को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया.

12 राज्यों ने ट्रंप टैरिफ को दी है चुनौती (12 states have challenged Trump’s tariffs)

दूसरी ओर, इस तर्क को 12 डेमोक्रेट-शासित अमेरिकी राज्यों और व्यवसायों द्वारा दायर याचिकाओं में चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि IEEPA कानून असाधारण आपात स्थितियों से निपटने के लिए है, न कि व्यापक और लंबी अवधि की व्यापार नीति को लागू करने के लिए. उनका दावा है कि टैरिफ तय करने का संवैधानिक अधिकार मुख्य रूप से अमेरिकी कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास.

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