Home > धर्म > सावन में क्या है कावड़ लाने के पीछे का वो अनुसना रहस्य? क्यों गंगाजल से ही होता है भगवान शिव का अभिषेक, रावण से जुड़ा है इसका कनेक्शन

सावन में क्या है कावड़ लाने के पीछे का वो अनुसना रहस्य? क्यों गंगाजल से ही होता है भगवान शिव का अभिषेक, रावण से जुड़ा है इसका कनेक्शन

Sawan Kanwar 2025: सावन महीने के शुरुआत होते ही कांवड़ियों की धूम नजर आने लगती है।कांवड़िये अपने कंधों पर जल रखकर हरिद्वार से पैदल अपने घर आते हैं और इस जल के शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।

By: Preeti Rajput | Last Updated: July 10, 2025 3:26:49 PM IST



Sawan Kanwar 2025: सावन के महीने की 11 जुलाई से होने वाली है। इस दिन भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी उपासना करते हैँ। इस महीने लाखों लोग हरिद्वार से कावड़ लाने के लिए भी जाते हैं। मान्यता के अनुसार, इससे भगवान शिव अपने भक्तों का मनोकामना पूरी करते हैं।  भगवान शिव और मां पार्वती को कंधे पर लेकर चलने का भाव ही कांवड़ यात्रा कहलाता है। जिसमें शिवभक्त हरिद्वार से जल लाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। 

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क्या है कांवड़ यात्रा का महत्व? 

यह प्रथा आज से नहीं त्रेतायुग से चली आ रही है। माना जाता है कि यह प्रथा भगवान शिव के परम भक्त रावण ने शुरू की थी। यह यात्रा सावन की शुरूआत से सावन के अंतिम दिन तक चलती है। कांवड़ का अर्थ है “कंधों पर रखा हुआ”। इसमें कड़ी की एक डंडी जिसके दोनों सिरों पर एक-एक पात्र होते है। जिसमें गंगा जल भरकर शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है। 

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 रावण से शुरू की यह प्रथा 

पुराणों के अनुसार, कांवड़ यात्रा की शुरुआत समुद्र मंथन और रावण से हुई थी। जब समुद्र मंथन से निकलने वाले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण कर लिया था। तो उनका कंठ नीला हो गया था। विष के ताप को कम करने के लिए रावण ने गंगाजल से भरे कांवड़ से उनका जलाभिषेक किया। तभी से इस यात्रा की शुरूआत हुई। 

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