Who is Sanae Takaichi: जापान की प्रधानमंत्री की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. दरअसल जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi के गठबंधन ने रविवार को हुए अचानक चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. जिसके बाद से ही वो चर्चाओं का केंद्र बन गईं हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवारों ने संसद के 465 सीटों वाले निचले सदन में 233 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया. वहीं लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने अकेले ही वोटिंग खत्म होने के दो घंटे से भी कम समय में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया. साथ ही आपको बता दें कि इसे पार्टी का अब तक का सबसे अच्छा चुनावी प्रदर्शन माना जा रहा है. रूढ़िवादी नेता सनाए ताकाइची, जो जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं, इसे लेकर उन्होंने कहा है कि वो ब्रिटेन की “आयरन लेडी” मार्गरेट थैचर से प्रेरित हैं. इतना ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सनाए ताकाइची को उनकी जीत पर बधाई दी. चलिए एक बार सनाए ताकाइची के संघर्ष भरे सफर पर नजर डाल लेते हैं.
जापान की पहली पसंद क्यों बनीं Sanae Takaichi?
हाल ही में जापान की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. बढ़ते ग्लोबल कंजर्वेटिज़्म और एंटी-इमिग्रेशन भावना के बीच सनाए ताकाइची देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी और सत्ता में आते ही इतिहास रच दिया. दरअसल, उनका सख्त और राष्ट्रवादी रुख खासकर उन मतदाताओं को पसंद आया है, जो इमिग्रेशन, चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और संविधान में बदलाव जैसे मुद्दों पर कड़ा रुख चाहते हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ताकाइची की पहचान एक कट्टर राष्ट्रवादी नेता के रूप में है. वो इमिग्रेशन और अपराध के मुद्दे पर काफी सख्त रुख रखती हैं. विश्लेषकों का कहना है कि उनका यह रुख उन मतदाताओं को वापस लाने की कोशिश है, जो एंटी-इमिग्रेशन संदेश देने वाली राष्ट्रवादी सेइसान्टो पार्टी की ओर झुक गए थे. ताकाइची का मानना है कि देश की सुरक्षा और पहचान सबसे पहले होनी चाहिए. वो चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर भी चिंतित हैं और जापान के संविधान के उस अनुच्छेद में बदलाव चाहती हैं, जो युद्ध के बाद सेना की भूमिका को सीमित करता है. उनकी सोच ‘नेशन फर्स्ट’ यानी देश पहले की नीति से प्रेरित है.
अमेरिका से आंख लड़ाने को तैयार Sanae Takaichi
खास बात तो ये है कि ताकाइची सिर्फ घरेलू मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि विदेश नीति में भी सख्त नजर आती हैं. उन्होंने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका के साथ कोई व्यापार समझौता जापान के लिए नुकसानदेह साबित होता है, तो वो अमेरिका का भी खुलकर सामना करेंगी. वो ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को अपना आदर्श मानती हैं, जिन्हें उनकी सख्ती के कारण ‘आयरन लेडी’ कहा जाता था. ताकाइची का राजनीतिक उदय पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे से जुड़ा हुआ है. आबे ने उन्हें पार्टी में अहम जिम्मेदारियां दी थीं और वे LDP के रूढ़िवादी गुट में मजबूत समर्थन रखती हैं. आर्थिक नीति के मामले में वे आबे की ‘एबेनॉमिक्स’ को आगे बढ़ाने की पक्षधर हैं, जिसमें मौद्रिक ढील और सरकारी खर्च बढ़ाने पर जोर दिया जाता है.
जापान के लिए बनी रीढ़
ताकाइची का प्रधानमंत्री बनना जापान में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जाएगा. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें एक नारीवादी नेता के रूप में नहीं देखा जाता. टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सदाफुमी कावाटो के अनुसार, उनका चुनाव महिलाओं के लिए राजनीति में एक सकारात्मक संकेत होगा, लेकिन उन्होंने पारंपरिक पितृसत्तात्मक व्यवस्था को चुनौती देने में खास रुचि नहीं दिखाई है. यानी वे महिला नेतृत्व का चेहरा तो बन सकती हैं, लेकिन महिलाओं के अधिकारों और समानता के मुद्दों पर वे आक्रामक बदलाव की पक्षधर नहीं मानी जातीं.