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Trump की नीतियां US पर पड़ रही भारी, करीबी सहयोगी ने छोड़ा साथ…चीन का थामा हाथ!भारत पर भी पड़ेगा असर

US South Korea Relations: आज के समय में अमेरिका के कई बड़े और करीबी सहयोगी दूर हो रहे हैं और इसके पीछे की वजह ट्रंप की नीतियां है। इस वक्त ट्रंप ने हर देश के खिलाफ टैरिफ वार छेड़ रखी है। इसमें उसके मित्र देश भी शामिल हैं। ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी भी सहयोगियों के दूर होने की बड़ी वजह बताई जा रही है।

Published by Shubahm Srivastava

US South Korea Relations: आज के समय में अमेरिका के कई बड़े और करीबी सहयोगी दूर हो रहे हैं और इसके पीछे की वजह ट्रंप की नीतियां है। इस वक्त ट्रंप ने हर देश के खिलाफ टैरिफ वार छेड़ रखी है। इसमें उसके मित्र देश भी शामिल हैं। ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी भी सहयोगियों के दूर होने की बड़ी वजह बताई जा रही है। इन सबकी वजह से फ्रांस, यूरोपियन देश धीरे-धीरे अमेरिका से दूरी बना रहे हैं। 

अब इस कड़ी में दक्षिण कोरिया का नाम भी जुड़ गया है। खास बात ये है कि अमेरिका का ये सहयोगी देश का चीन की और झुकाव देखने को मिल रहा है। बता दें कि दक्षिण कोरिया अमेरिका के पक्के साझेदार में गिना जाता है। 

चीन-दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ते रिश्ते

दरअसल, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने रविवार को एक विशेष प्रतिनिधिमंडल चीन भेजा था। ये यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 33वीं वर्षगांठ पर हुई। इस चार दिवसीय यात्रा का नेतृत्व पूर्व नेशनल असेंबली स्पीकर पार्क ब्युंग-सुग कर रहे हैं, जो राष्ट्रपति का एक निजी पत्र लेकर बीजिंग पहुँचे हैं।

योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल में सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद किम ताए-न्योन और पार्क जंग के साथ-साथ पूर्व राष्ट्रपति रोह ताए-वू के बेटे रोह जे-हुन भी शामिल हैं। ज़ाहिर है कि यह यात्रा महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि चीन और दक्षिण कोरिया के बीच नए समीकरणों के निर्माण की शुरुआत है।

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अमेरिका पर कैसे पड़ेगा इसका असर

एशिया में, अमेरिका का भारत के साथ व्यापार को लेकर पहले से ही तनाव चल रहा है। और अब अपने पुराने सहयोगी दक्षिण कोरिया का धीरे-धीरे साथ छोड़ना भी अमेरिका के लिए अच्छी खबर नहीं है। इसका वाशिंगटन की हिंद-प्रशांत रणनीति पर बड़ा असर पड़ेगा। क्योंकि अमेरिका चाहता है कि दक्षिण कोरिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया उसके साथ मिलकर चीन को घेरें। लेकिन अगर सियोल बीजिंग के साथ संबंध सुधारता है, तो इससे अमेरिका की कोरिया को अपने खेमे में रखने की रणनीति कमज़ोर पड़ जाएगी।

भारत पर भी पड़ेगा असर

आपको बता दें कि हाल के दिनों में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच तकनीक और व्यापार में सहयोग बढ़ा है। इसके अलावा, भारत और दक्षिण कोरिया ने रक्षा सहयोग भी बढ़ाया है। चाहे वह नौसैनिक जहाज निर्माण हो या तोपखाना प्रणाली। लेकिन अगर सियोल-बीजिंग संबंध गहरे होते हैं, तो भारत को अपने रक्षा सौदों और रणनीति को और सावधानी से चलाना होगा।

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