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9 महीने बर्फ में गायब रहा रोबोट, लौटकर किया बड़ा खुलासा; वैज्ञानिक रह गए हैरान

एक रोबोट लगभग 9 महीने तक अंटार्कटिक की बर्फ में गायब रहा और फिर अचानक दोबारा दिखाई दिया है. इस दौरान उसने जरूरी डेटा इकट्ठा किया है. वैज्ञानिक रोबोट के इस कारनामे से हैरान है.

Published by Mohammad Nematullah

अंटार्कटिका में एक छोटा रोबोट गायब हो गया था. लेकिन फिर अप्रत्याशित रूप से वापस आ गया है. यह रोबोट जिसे आर्गो फ्लोट भी कहा जाता है. समुद्र का तापमान और खारेपन को मापता है. वैज्ञानिक ने इसे टोटेन ग्लेशियर के पास तैनात किया था. अगर वहां की बर्फ पूरी तरह पिघल जाती है, तो समुद्र का स्तर 3.5 मीटर तक बढ़ सकता है. हालांकि रोबोट जल्दी ही बह गया है. इससे वैज्ञानिक बहुत निराश थे. क्योंकि वे टोटेन ग्लेशियर के पिघलने का कारण समझना चाहते थे. अब रोबोट डेनमैन और शेकलटन बर्फ की चादरों के नीचे से यात्रा करके वापस आ गया है. रोबोट ने 9 महीने बर्फ के नीचे बिताए और महत्वपूर्ण डेटा इकट्ठा किया है.

आर्गो फ्लोट रोबोट क्या है?

द डिब्रीफ की एक रिपोर्ट के अनुसार आर्गो फ्लोट एक ऑटोमैटिक रोबोट है, जो समुद्र में घूमता है. यह दो किलोमीटर की गहराई तक नीचे जाता है. और ऊपर नीचे होता है. हर दस दिन में यह सतह पर आता है और सेटेलाइट के जरिए डेटा भेजता है. दुनिया भर में ऐसे हजारों फ्लोट काम कर रहें है. इस खास रोबोट ने पहली बार पूर्वी अंटार्कटिका की बर्फ की चादर के नीचे हर पांच दिन में तापमान का डेटा इकट्ठा किया है. 

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वैज्ञानिक क्या जानना चाहते थे?

अंटार्कटिक बर्फ की चादर बर्फ की बड़ी तैरती हुई चादरें होती है. वे जमीन की बर्फ को समुद्र में बहने से रोकती है. अगर गर्म पानी नीचे से उन तक पहुंचता है, तो वे पिघल जाती है. जब वे पिघलती है, तो जमीन की बर्फ ज़्यादा तेज़ी से समुद्र में बहती है. जिससे समुद्र का स्तर बढ़ जाता है. डेनमैन ग्लेशियर में इतनी बर्फ है कि अगर यह पूरी तरह पिघल जाए, तो समुद्र का स्तर 1.5 मीटर बढ़ जाएगा. शेकलटन आइस शेल्फ पूर्वी अंटार्कटिका में सबसे उत्तरी बर्फ की चादर है. वैज्ञानिक जानना चाहते थे कि क्या गर्म पानी इन बर्फ की चादरों के नीचे पहुंच रहा है. अब रोबोट ने यह जानकारी दे दी है.

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रोबोट ने 300 किमी की यात्रा की

रोबोट टोटेन से डेनमैन के पास बह गया है. वहां बर्फ के नीचे गर्म पानी बह रहा था, जो पिघलने का कारण हो सकता है. फिर रोबोट बर्फ के नीचे चला गया है. वैज्ञानिकों को लगा कि यह कभी वापस नहीं आएगा. लेकिन नौ महीने बाद यह डेनमैन और शेकलटन बर्फ की चादर के नीचे से बाहर निकला है. इस दौरान इसने 300 किलोमीटर की यात्रा की और लगभग 200 बार डेटा इकट्ठा किया है. क्योंकि यह बर्फ के नीचे था, इसलिए इसे GPS सिग्नल नहीं मिल रहा था, लेकिन जब भी रोबोट को बर्फ मिली, उसने बर्फ की मोटाई मापी है. इस डेटा को पुराने सैटेलाइट जानकारी के साथ मिलाकर वैज्ञानिक इसके रास्ते का पता लगा पाए.

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वैज्ञानिक ऐसे कई और रोबोट भेजेंगे. डेटा से पता चला है कि गर्म पानी अभी शैकेल्टन आइस शेल्फ के नीचे नहीं पहुंच रहा है. वहां का पानी ठंडा है, और बर्फ अभी स्थिर है. हालांकि डेनमैन ग्लेशियर के नीचे गर्म पानी बह रहा है, जिससे बर्फ पिघल रही है. अगर गर्म पानी की मात्रा थोड़ी भी बढ़ती है, तो पिघलने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी, और बर्फ तेज़ी से पिघलेगी. टोटेन और डेनमैन ग्लेशियर मिलकर समुद्र का लेवल पांच मीटर तक बढ़ा सकते है. यह नई जानकारी वैज्ञानिकों को क्लाइमेट मॉडल को बेहतर बनाने में मदद करेगी. वैज्ञानिक अब ऐसे और रोबोट भेजने की योजना बना रहे है.

Mohammad Nematullah

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