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धार्मिक स्कूलों में अफगानी महिलाओं के साथ हो रहा था ये काम, अब तालिबान प्रमुख ने उठाया बड़ा कदम, दुनिया भर में मचा हंगामा

Afghanistan: कहा जा रहा है कि अखुंदज़ादा को पता चला था कि कई धार्मिक स्कूलों में न सिर्फ़ इस्लामी शिक्षा, बल्कि गणित, विज्ञान और भाषाएँ भी पढ़ाई जा रही हैं। इसीलिए उसने यह कड़ा फ़ैसला लिया।

Published by Divyanshi Singh

Afghanistan: अफ़ग़ानिस्तान एक बार फिर हैरान करने वाला मामला सामने आ रहा है। एक नया आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत धार्मिक शिक्षा यानी मदरसों में भी लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा पर रोक लगा दी गई है। अल-अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान प्रमुख हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा ने हाल ही में यह आदेश दिया है। सूत्रों का कहना है कि पिछले हफ़्ते कंधार में हुई कैबिनेट बैठक में अखुंदज़ादा ने शिक्षा मंत्रालय और उच्च शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि वे धीरे-धीरे धार्मिक स्कूलों में भी महिलाओं का प्रवेश बंद कर दें। पहला कदम यह होगा कि अब उन्हें स्नातक प्रमाणपत्र नहीं दिए जाएँगे।

इस वजह से लिया फैसला

कहा जा रहा है कि अखुंदज़ादा को पता चला था कि कई धार्मिक स्कूलों में न सिर्फ़ इस्लामी शिक्षा, बल्कि गणित, विज्ञान और भाषाएँ भी पढ़ाई जा रही हैं। इसीलिए उसने यह कड़ा फ़ैसला लिया। इस आदेश से तालिबान मंत्रिमंडल में तीखी बहस छिड़ गई। कुछ मंत्रियों ने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की और कहा कि वे इस साल लड़कियों के लिए एक स्कूल खोलने की उम्मीद कर रहे हैं।

कई मंत्रियों ने कुरान और हदीस की आयतें पेश कीं जिनमें साफ़ तौर पर कहा गया है कि लड़के और लड़कियों दोनों के लिए शिक्षा ज़रूरी है। लेकिन हिबतुल्लाह ने फिर वही सवाल उठाया कि एक स्पष्ट इस्लामी तर्क दें कि एक छोटी लड़की को घर से बाहर पढ़ाई के लिए क्यों जाना चाहिए। इससे पहले भी, जब विश्वविद्यालयों में लड़कियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात हुई थी, तब भी उन्होंने यही तर्क दिया था।

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मुखिया की आलोचना शुरू

बैठक में बहस इतनी तीखी हो गई कि कुछ तालिबान नेताओं ने सीधे अपने मुखिया की आलोचना शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि इस रवैये से तालिबान के भीतर गुस्सा और मतभेद पैदा होंगे और उन्हें दुनिया से और ज़्यादा विरोध का सामना करना पड़ेगा। कई लोगों को शक है कि अख़ुंदज़ादा किसी विदेशी एजेंडे के तहत जानबूझकर उनकी सरकार को कमज़ोर करना चाहता है।

चार साल और विवादास्पद फ़ैसले

15 अगस्त 2021 को अमेरिकी सेना के वापस जाने और 20 साल पुराने युद्ध के समाप्त होने के बाद तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा कर लिया। लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने शरिया कानून की अपनी सख्त व्याख्या लागू कर दी। इसके तहत महिलाओं और लड़कियों पर भारी पाबंदियाँ लगा दी गईं। छठी कक्षा के बाद शिक्षा बंद कर दी गई, नौकरी के अवसर लगभग खत्म हो गए और घर से बाहर निकलने पर भी पाबंदी लगा दी गई। संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठन और कई देश तालिबान के इस रवैये की लगातार निंदा कर रहे हैं। लेकिन अभी तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

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Divyanshi Singh
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