UP News: सपरिवार आत्मदाह को मजबूर ग्रामीण, जिला प्रशासन पर सवाल

UP News: अमेठी में बंद रास्ते के लिए ग्रामीण का आत्मदाह का अल्टीमेटम, प्रशासन पर उठे सवाल

Published by Swarnim Suprakash

अमेठी, उत्तर प्रदेश से संजय यादव की रिपोर्ट 
UP News: प्रशासनिक लापरवाही के चलते आम जनता के सामने आने वाली समस्याएं कई बार गंभीर रूप ले लेती हैं। ऐसा ही एक मामला अमेठी जनपद से सामने आया है, जहां एक परिवार ने अपने घर के बंद रास्ते को खुलवाने के लिए बार-बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर अब सपरिवार आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। इस घटना ने एक बार फिर जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

अवरुद्ध रस्ते से परिवार का जीवन दुर्लभ

अमेठी जिले के पीपरपुर थाना क्षेत्र के बालीपुर डुहिया गांव निवासी नन्हेंलाल गुप्ता ने बताया कि उनके पड़ोसी रामनाथ गुप्ता ने उनके घर के एकमात्र आवागमन के रास्ते में मिट्टी डालकर उसे अवरुद्ध कर दिया है। इसकी वजह से नन्हेंलाल और उनका परिवार घर से बाहर निकलने में असमर्थ है। घर के अंदर कैद होने की स्थिति में परिवार का जीवन दुर्लभ हो गया है। नन्हेंलाल ने बताया कि उनके परिवार के सदस्यों और पशुओं का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। नन्हेंलाल ने इस समस्या के समाधान के लिए कई बार प्रशासन का दरवाजा खटखटाया।

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सपरिवार आत्मदाह को मजबूर – जिला प्रशासन  होगा जिम्मेदार

उन्होंने 25 जुलाई, 1 अगस्त, 18 अगस्त और 20 अगस्त 2025 को जिलाधिकारी को संबोधित शिकायती पत्र दिए। इसके अलावा संपूर्ण समाधान दिवस और थाना दिवस पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। नन्हेंलाल का कहना है कि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है और उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला जा रहा। हाल ही में नन्हेंलाल सपरिवार अमेठी जनपद मुख्यालय गौरीगंज स्थित कलेक्ट्रेट पहुंचे और जनसुनवाई अधिकारी को एक और शिकायती पत्र सौंपा। इस पत्र में उन्होंने साफ लिखा कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनका रास्ता नहीं खुलवाया गया तो वे सपरिवार आत्मदाह करने को मजबूर होंगे, जिसके लिए पूरा जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा। 

गौरीगंज कोतवाली ने नन्हेंलाल को हिरासत में लिया

हालांकि, पत्र सौंपने के तुरंत बाद गौरीगंज कोतवाली पुलिस ने नन्हेंलाल को हिरासत में ले लिया, जिससे प्रशासन की संवेदनहीनता और सख्ती एक बार फिर उजागर हुई। 
यह घटना न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि आखिर आम नागरिक को अपनी बात रखने के लिए इतने कठोर कदम क्यों उठाने पड़ रहे हैं। नन्हेंलाल के परिवार की स्थिति चिंताजनक है, और प्रशासन को तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप कर रास्ता खुलवाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और गंभीर रूप ले सकता है।

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