जेल में रहकर सीखा ‘हुनर’, जमानत पर छूटते ही अकाउंट किया खाली

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ की जेल से जमानत पर रिहा हुए कैदी (Prison) ने एक चौंकाने वाले धोखाधड़ी के मामले को अंजाम (Shocking Fraud Case) दिया है. उसने जेल प्रशासन के कामकाज और चेक पर हस्ताक्षर करने के तरीके को समझकर जेल की बैंक चेकबुक (Bank Cheque Book) चुरा ली और फर्जी दस्तखत (Fake Signature) करके लगभग 30 लाख रुपये निकाल लिए.

Published by DARSHNA DEEP

Uttar Pradesh Crime News: आपने चोरी तो कई तरह की देखी होगी, लेकिन एक चोर की अनोखी चोरी शायद ही पहली बार देखी होगी. ऐसा ही चौंकाने वाला मामला उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से सामने आया है. जहां, जेल से जमानत पर रिहा हुए कैदी रामजीत यादव ने बड़े ही शातिर तरीके से चोरी के साथ-साथ धोखाधड़ी की घटना को अंजाम देने में सफलता हासिल की है. आखिर क्या है पूरा मामला हमारी इस खबर में पढ़िए.

धोखाधड़ी करने का अनोखा तरीका:

अपनी पत्नी की हत्या के मामले में दोषी रामजीत यादव ने जेल से बाहर निकलते समय बड़ी ही चालाकी से जेल के अकाउंटेंट के कमरे से बैंक की चेकबुक चुरा ली. रामजीत यादव को 24 फरवरी साल 2023 को उसकी पहली पत्नी अनीता की हत्या के मामले में सजा सुनाई गई थी, लेकिन वह 20 मई, 2024 को दोबारा जमानत पर रिहा हो गया था. 
रिहा होने से ठीक पहले उसने चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम दिया. 

जेल में रहकर चोरी की साजिश:

जेल में रहने के दौरान उसने जेल प्रशासन के कामकाज और चेक पर हस्ताक्षर करने के तरीके को बड़े ही अच्छी तरह से समझा था. इसके बाद उसने जेल अधीक्षक के फर्जी हस्ताक्षर करके 21 मई को 10 हजार और फिर 22 मई को 50 हजार और ऐसे करते-करते थे कुछ दिन बाद ही 1.40 लाख रुपये खाते में से निकाल लिए. डेढ़ साल के दौरान रामजीत यादव धीरे-धीरे 30 लाख रुपये से ज्यादा की राशि फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से जेल के बैंक खाते से निकालने में कामयाब रहा. इसके बाद उसने इन राशियों को अपनी मां और दूसरी पत्नी के खाते में तुरंत ट्रांसफर कर दिया. 

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फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा:

इस धोखाधड़ी का खुलासा 22 सितंबर, 2025 को हुआ था. जब रामजीत यादव ने खाते से 2.60 लाख रुपये निकाले थे. इसके अलावा मोबाइल पर आए मैसेज के बाद जेल अधीक्षक आदित्य कुमार सिंह ने खाते का स्टेटमेंट निकलवाया, जिससे पूरे फर्जीवाड़े का गेम पता चल सका. 

जेलकर्मी भी घटना में शामिल:

इस धोखाधड़ी में न केवल रामजीत यादव बल्कि उसके साथ-साथ जेल के दो कर्मचारी भी शामिल थे. जेल अधीक्षक ने इस मामले में कुल चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की है. 

जांच में यह पता चला है कि रामजीत यादव खुद को जेल का ठेकेदार बताकर लगातार धोखे से पैसे निकाल रहा था. लखनऊ मुख्यालय से आजमगढ़ जेल अधिकारियों को इस बड़ी लापरवाही के लिए जमकर फटकार भी लगाई गई है. फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई  शुरू कर दी है. 

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