Magh Mela: क्या शंकराचार्य नहीं हैं अविमुक्तेश्वरानंद? प्रशासन ने मांगासबूत, 5 Points में समझें पूरा विवाद

Swami Avimukteshwaranand: जैसा की आप सभी जानते हैं कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद तीन दिनों से धरने पर बैठे हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि मौनी अमावस्या के दौरान उनके रथ को रोक दिया गया और उनके शिष्यों पर कथित तौर पर हमला किया गया.

Published by Heena Khan

Swami Avimukteshwaranand: जैसा की आप सभी जानते हैं कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद तीन दिनों से धरने पर बैठे हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि मौनी अमावस्या के दौरान उनके रथ को रोक दिया गया और उनके शिष्यों पर कथित तौर पर हमला किया गया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रयागराज में माघ मेले के प्रशासन ने उनसे 24 घंटे के अंदर शंकराचार्य होने का सबूत देने की मांग भी कर डाली है. इसके जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने कुछ ऐसा कहा जो हैरान कर देने वाला है. 

जाने क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद

दरअसल, इस पूरे मामले के बाद प्रशासन के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट का बहाना बनाकर अपनी गलती छिपाने की कोशिश कर रहा है. वो कब तक सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को गलत तरीके से पेश करके बचते रहेंगे? सरकार ने खुद महाकुंभ के दौरान एक मैगज़ीन छापी थी, जिसमें मुझे शंकराचार्य बताया गया था.

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5 पॉइंट में समझें पूरा विवाद

  • जानकारी के मुताबिक, रविवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान के लिए जा रहे थे. इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने के आदेश दिए. जब उन्होंने पुलिस के इस आदेश का विरोध विरोध किया, तो उनके शिष्यों पर हमला किया गया.
  • वहीं इस बात से अविमुक्तेश्वरानंद आक्रोश में हैं. जिसके बाद अपने शिष्यों पर हमले और पालकी रोके जाने से नाराज़ होकर अविमुक्तेश्वरानंद अपने कैंप के बाहर धरने पर बैठ गए.
  • आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सोमवार रात 12 बजे, कानूनगो अनिल कुमार माघ मेले में शंकराचार्य के कैंप पहुंचे. इस दौरान उन्होंने शंकराचार्य के शिष्यों से एक नोटिस लेने को कहा. इस दौरान उनके शिष्यों ने  साफ़ मना कर दिया और कहा कि इतनी रात में कोई मौजूद नहीं है और उन्हें सुबह आना चाहिए.
  • कानूनगो अनिल कुमार मंगलवार सुबह शंकराचार्य के कैंप लौटे. उन्होंने नोटिस गेट पर चिपका दिया. यह नोटिस मेला प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन ने जारी किया था.
  • ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य की उपाधि को लेकर अविमुक्तेश्वरानंद और वासुदेवानंद के बीच विवाद है. यह मामला कोर्ट में पेंडिंग है.

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