जेल में क्या आजम खान को लग रहा था अपनी ‘हत्या’ का डर? क्यों कहा- ‘इतना घटिया तो नहीं हूं’

Azam Khan News: आजम खान ने कहा कि मुख्तार अंसारी की मौत के बाद वे जेल में थोड़ा सतर्क हो गए थे. उन्होंने कहा कि मुख्तार अंसारी की मौत के बाद वे जेल में बस अचार से रोटी खाने लगे थे.

Published by Hasnain Alam

Azam Khan Latest News: समाजवादा पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद अपने अनुभव को शेयर किया है. इस दौरान उन्होंने मुख्तार अंसारी की मौत का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मुख्तार अंसारी की मौत के बाद वे थोड़ा सतर्क हो गए थे. उन्होंने बताया कि उनकी मौत के बाद वे जेल में बस अचार से रोटी खाने लगा था. एक रोटी बहुत पतली सी दोपहर में और एक में से आधी या पौन रोटी अचार से रात में खा लेता था. पेट ही तो भरना था. सांस चलती रहे, बस इतनी ही जरूरत होती है. 

उन्होंने आगे कहा- ‘कारून, जिसके खजाने की तारीख है. क्या लेकर गया, खुले हाथ गया. बिल गेट्स क्या लेकर जाएंगे, खुले हाथ जाएंगे. लेकिन अपना कर्म साथ लेकर जाएंगे, जिसका हिसाब होना है. मेरा अल्लाह घृणा से मना करता है. वो रब्बुल आलमीन है. वो रब्बुल मुस्लिमीन नहीं है. जब सबका रब है तो उसके बनाए हुए लोगों से नफरत करने का मुझे हक नहीं है.’

सॉफ्ट कॉर्नर के सवाल पर क्या बोले आजम खान?

इस दौरान आजम खान ने सरकार की तरफ से सॉफ्ट कॉर्नर होने के सवाल पर कहा कि ऐसा होता तो धाराएं वापस हो जातीं. मेरी जमानत हुई है. अभी मेरी अदालत में हाजिरी बाकी है. इन धाराओं के लिए सौदा करूंगा. इतना घटिया समझ लिया आपने मुझे कि सौदा भी करूंगा तो इतनी घटिया बात के लिए करूंगा. इतना घटिया तो नहीं हूं. उन्होंने कहा कि जिन्होंने यह बात कही होगी, वह इतने घटिया होंगे, मैं नहीं हो सकता. पांच साल सहने के बाद पूरा शहर बर्बाद, पूरा घर खानदान बर्बाद, फिर इन धाराओं के लिए सौदा करूंगा.

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इस मौके पर आजम खान ने कहा- ‘मैं कितना और जिऊंगा. इसी समाज के लिए छोड़कर जाऊंगा. इसी देश के लिए छोड़कर जाऊंगा. मेरा घर देख लीजिए और मेरी यूनिवर्सिटी देख लीजिए. मैंने अपने लिए कुछ नहीं बनाया. न अपने लिए कुछ मांगा. किसी से सोने चांदी के कंगन मैंने नहीं मांगे. लेकिन, कलम मांगा था.’

मैं रामपुर वालों की उस पहचान को बदलना चाहता था: आजम खान

आजम खान ने कहा कि रामपुर किस लिए जाना जाता था? नवाबों के लिए, चाकू के लिए. फिल्मों में भी नाम आता है तो ‘आपको रामपुरी चाकू से मार देंगे’ आता है. उन्होंने कहा- ‘मैं रामपुर वालों की उस पहचान को बदलना चाहता था और मैंने बदला उस पहचान को, कलम से उनकी पहचान कराई. आज कैसा रामपुर है, जबकि इन 10 सालों में बर्बाद हो गया. उसके बावजूद देख लीजिए कैसा रामपुर है.’ 

उन्होंने कहा कि वो कौन बदनसीब है और इस समाज, देश और शहर का वह कौन दुश्मन है, जिसने चौराहे पर कलम नहीं लगाया. 80 लाख का चाकू बनाकर लगाया. यह नफरत हमसे है ताकि इतिहास से इनके नाम की ये जिल्लत मिट न जाए. आने वाला जमाना याद रखे कि इस शहर के लोग चाकू से पहचाने जाते हैं. सपा नेता ने कहा- ‘इतनी गिरकर सोच, इतना जुल्म, क्या कुदरत हिसाब नहीं लेगी? देर लग सकती है. कहते हैं न देर है, अंधेर नहीं है.’

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