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कब, कौन और कहां पर हुई थी गाली देने की शुरूआत? इतिहास के पन्नों में हो रखा है इनका जिक्र

Who Begin Abuse: पीएम मोदी (PM Modi) की मां के लिए गाली दीक्या आपके मन में कभी ये सवाल नहीं उठा की दुनिया में सबसे पहले गाली की शुरूआत कहा पर हुई थी? चलिए इस बारे में जानते हैं।

Published by Shubahm Srivastava

Who Begin Abuse: बिहार (Bihar) में इस समय राजनीति गरमाई हुई है। हाल ही में विपक्ष ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ (Voter Adhikar Yatra) निकाली थी। इसी दौरान बिहार के दरभंगा में कांग्रेस और उसके एक सहयोगी दल के स्थानीय नेता की जनसभा के दौरान एक व्यक्ति ने माइक पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए पीएम मोदी (PM Modi) की मां के लिए गाली दी। इस घटना के बाद पटना से दिल्ली तक हंगामा मच गया।

फिलहाल पुलिस ने उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन मामला थमता नजर नहीं आ रहा है। इसे लेकर एनडीए (NDA) ने 4 सितंबर को बिहार बंद का ऐलान किया है। गाली-गलौज की इस घटना को लेकर पीएम मोदी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि, ‘यह सिर्फ मेरी मां का अपमान नहीं है, बल्कि देश की मां, बहन, बेटी का अपमान है।’

ये मामला फिलहाल खत्म होता हुआ तो नहीं दिख रहा है, लेकिन क्या आपके मन में कभी ये सवाल नहीं उठा की दुनिया में सबसे पहले गाली की शुरूआत कहा पर हुई थी? चलिए इस बारे में जानते हैं।

गाली देने की शुरुआत कहा और कब हुई?

आज के समय में गाली-गलौज आम बात हो गई है। लोग अपना गुस्सा ज़ाहिर करने के लिए एक-दूसरे को गालियाँ देते हैं। लेकिन क्या आप इनके पीछे का इतिहास जानते हैं? वो भी काफ़ी दिलचस्प और चौंकाने वाला है। वैज्ञानिकों और इतिहासकारों की मानें तो गालियों की जड़ें हज़ारों साल पुरानी सभ्यताओं में जाती हैं।

हालाँकि, यह कहना अभी भी मुश्किल है कि गाली का इस्तेमाल सबसे पहले किसने किया या इसकी शुरुआत कहाँ से हुई – क्योंकि यह किसी एक व्यक्ति द्वारा गढ़ा गया शब्द नहीं है।

आमतौर गाली देना मानवीय भावनाओं को व्यक्त करने का एक स्वाभाविक तरीका है, जो मानव इतिहास जितना ही पुराना है। जब कोई व्यक्ति क्रोधित, दुखी या निराश होता है, तो वह कठोर शब्दों का प्रयोग करता है।

इतिहास के पन्नों में गालियों का जिक्र

वैसे, आपको बता दें कि इतिहास के पन्नों में गालियों जैसे कठोर शब्दों का भी ज़िक्र मिलता है, जैसे मेसोपोटामिया और मिस्र की प्राचीन सभ्यताओं में विरोधियों या किसी और का अपमान करने के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। लेकिन आपको बता दें कि ये शब्द आज की तरह गालियाँ नहीं थे, बल्कि ज़्यादातर शाप या ताने जैसे होते थे।

भारतीय संस्कृति में, वैदिक ग्रंथों और ऋग्वेद में भी इनका प्रयोग हुआ है। यहाँ भी विरोधियों को अपमानित करने के लिए असुर या म्लेच्छ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है।

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Shubahm Srivastava
Published by Shubahm Srivastava

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