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अंतरिक्ष में पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा खतरा, वैज्ञानिकों की बड़ी चेतावनी – बरसेंगे ‘आग के गोले’

Halloween Fireballs: वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भविष्य में पृथ्वी को संभावित अंतरिक्षीय खतरों—जैसे वायुमंडलीय विस्फोट या सतह पर टक्कर—के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है.

Published by Shubahm Srivastava

Science Latest News: टॉरिड उल्का बौछार (Taurid Meteor Shower) हर साल अक्टूबर के अंत से नवंबर की शुरुआत तक देखी जाती है, जिसे ‘हैलोवीन फायरबॉल्स’ (Halloween Fireballs) के नाम से भी जाना जाता है. यह वृषभ (Taurus) तारामंडल की दिशा से दिखाई देती है और इसकी उल्काएं आमतौर पर जमीन तक पहुंचने से पहले ही जल जाती हैं. 

हालांकि यह घटना देखने में सुंदर होती है, वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भविष्य में पृथ्वी को संभावित अंतरिक्षीय खतरों—जैसे वायुमंडलीय विस्फोट या सतह पर टक्कर—के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है.

क्या पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा है खतरा?

न्यू मैक्सिको विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञानी मार्क बोस्लो के अनुसार, टॉरिड धारा में बड़ी वस्तुओं का समूह मौजूद हो सकता है जो आने वाले वर्षों में जोखिम पैदा कर सकता है. शोध से संकेत मिले हैं कि 2032 और 2036 में यह धारा पृथ्वी के और करीब से गुजरेगी, जिससे वायुमंडल में विस्फोट या धरती से टकराव की संभावना बढ़ सकती है. 

वैज्ञानिकों ने चांद पर भूकंपीय संकेतों और चमकीले आग के गोलों के रूप में इनके प्रभाव को पहले ही देखा है, जो इस झुंड की मौजूदगी की पुष्टि करते हैं.

बोस्लो बताते हैं कि ग्रहों की सुरक्षा (Planetary Defense) एक वैश्विक प्रयास है जिसमें कई चरण शामिल हैं—इन पिंडों की खोज और निगरानी, टकराव की संभावना का मॉडल बनाना, जोखिम कम करने की रणनीतियां तैयार करना, और जरूरत पड़ने पर उन्हें मार्ग से हटाना या चेतावनी जारी करना.

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क्या है इसका इतिहास?

इन पिंडों को NEO (Near-Earth Objects) कहा जाता है, जिनमें क्षुद्रग्रह (Asteroids) और धूमकेतु (Comets) शामिल होते हैं, जो ग्रहों की गुरुत्वाकर्षण के कारण ऐसी कक्षाओं में घूमते हैं जो पृथ्वी के रास्ते को काट सकती हैं. इतिहास में रूस के चेल्याबिंस्क उल्कापिंड और साइबेरिया के तुंगुस्का विस्फोट जैसी घटनाएं इसी तरह की टक्करों से जुड़ी रही हैं.

टॉरिड झुंड के पिंड सूर्य की सात परिक्रमा पूरी करते हैं, जबकि बृहस्पति दो करता है, जिससे यह विशाल ग्रह उन्हें घने समूहों में खींच लेता है. वैज्ञानिक 2032 और 2036 से पहले उन्नत दूरबीनों और टार्गेटेड स्काई सर्वे के जरिए इस धारा की वास्तविक उपस्थिति और खतरे की संभावना की पुष्टि करने की योजना बना रहे हैं.

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Shubahm Srivastava
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