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mahashivratri 2026: इस शिवरात्रि शिव पुराण में बताए खास उपायों से करें शिव की आराधना, बरसेगा धन और घर में आएगी सुख-समृद्धि, जानें पूरी विधि

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव पुराण में बताए गए विशेष उपायों और पूजा-विधि का पालन करना अत्यंत फलदायी माना गया है. इस दिन नियमपूर्वक किए गए अनुष्ठान जीवन में सुख, शांति, धन और समृद्धि लेकर आते हैं.

By: Ranjana Sharma | Published: February 11, 2026 5:13:32 PM IST



Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है. फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह उत्सव केवल उपवास और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक साधना और आत्मशुद्धि का भी विशेष दिन माना जाता है. धार्मिक ग्रंथ शिव पुराण में महाशिवरात्रि की रात किए जाने वाले पूजन, अभिषेक और जागरण का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए अनुष्ठान जीवन में सुख, शांति, धन और समृद्धि लेकर आते हैं. धार्मिक आस्थाओं के अनुसार महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन की प्रतीक मानी जाती है. इसलिए इस दिन की गई पूजा कई गुना फलदायी मानी गई है.

गन्ने के रस या शक्कर मिले दूध से अभिषेक का महत्व

शिव पुराण में वर्णन मिलता है कि महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का विशेष अभिषेक करना चाहिए. गन्ने के रस या शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने को अत्यंत शुभ बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में आने वाली आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है. इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस उपाय से रोग, मानसिक तनाव और कष्टों में कमी आती है.

चार प्रहर की पूजा क्यों है खास?

  • महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में बांटकर पूजा करने की परंपरा है। प्रत्येक प्रहर का अलग महत्व माना गया है.
  • पहला प्रहर: दूध से अभिषेक- जीवन में पवित्रता और शांति का प्रतीक.
  • दूसरा प्रहर: दही से अभिषेक-समृद्धि और स्थिरता का संकेत.
  • तीसरा प्रहर: घी से अभिषेक-शक्ति और तेज की प्राप्ति के लिए.
  • चौथा प्रहर: शहद से अभिषेक-मधुरता और सौभाग्य के लिए.

दीपक जलाने का विशेष महत्व

शिव मंदिर में या घर पर स्थापित शिवलिंग के समीप महाशिवरात्रि की रात दीपक जलाना शुभ माना गया है. मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और दरिद्रता का नाश होता है. कुछ धार्मिक मान्यताओं में इसे कुबेर के समान वैभव प्राप्ति से भी जोड़ा गया है.

बेलपत्र और अक्षत चढ़ाने की परंपरा

भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना गया है. शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है. साथ ही साबुत चावल (अक्षत) चढ़ाने से धन लाभ और कार्यों में सफलता मिलती है. विशेषज्ञों के अनुसार बेलपत्र अर्पित करते समय उस पर चंदन से ‘ॐ’ लिखकर चढ़ाना और मंत्र जाप करना और भी फलदायी माना जाता है.

रात्रि जागरण और मंत्र जाप का आध्यात्मिक महत्व

महाशिवरात्रि की पूरी रात जागकर भजन-कीर्तन करना और “ओम नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि इससे मानसिक शांति मिलती है, भय दूर होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. मंत्र जाप के साथ ध्यान और संयम रखने से आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है.

मासिक शिवरात्रि का विशेष बेलपत्र उपाय

मान्यता है कि यदि हर महीने आने वाली शिवरात्रि पर शिवलिंग पर पांच बेलपत्र श्रद्धा से अर्पित किए जाएं तो एक वर्ष के भीतर कार्यों में सफलता मिलने लगती है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है. इसे नियमित रूप से करने से बाधाएं कम होती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है.

पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
  • मन में शुद्ध भावना और संयम रखें.
  • शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद स्वयं ग्रहण करने के बजाय मंदिर में वितरित करें 
  • बेलपत्र ताजा और साफ होना चाहिए.

आस्था और श्रद्धा का पर्व

महाशिवरात्रि केवल धन प्राप्ति का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और भक्ति का अवसर भी है. शिव पुराण में बताए गए उपायों को श्रद्धा और सच्चे मन से करने पर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है.

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