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Navratri 2025: नवरात्रि के इस दिन महिलाओं को नहीं करनी चाहिए ये बड़ी गलती! लग सकता है गर्भनाश जैसा दोष

Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि के चौथा दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा का होता है, जिन्होंने ब्रह्मांड की रचना की थी. ऐसे में आज के दिन महिलाओं को एक काम बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए, नहीं तो गर्भनाश जैसा दोष लग सकता हैं, तो चलिए जानते हैं क्या है वो काम

Published by chhaya sharma

Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. आज नवरात्रि का चौथा दिन है, जो मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कूष्मांडा का होता है और इनका  निवास सूर्यलोक में होता है. कहा जाता है कि मां कूष्मांडा ने ही ब्रह्मांड की रचना की थी और इनका रूप अष्टभुजा कूष्मांडा ने अपने दाएं हाथ में कमल, धनुष, बाण और कमंडल लिए हुए और हाथ में गदा, चक्र और जप माला लिए हुए बताया गया. मां कूष्मांडा की पूजा से संतान की रक्षा होती है, ऋग्वेदों में सूर्य को हिरण्यगर्भ बताया गया है, जिसका अर्थ होता है आवरण जिसके भीतर सुनहला प्रकाश होता है और यही आवरण मां कूष्मांडा का भी है. इसके समस्त संसार की चेतना गर्भस्त शिशु के रूप में मौजूद होती है. ऐसे में आज के दिन महिलाएं एक ऐसा काम है, जो नहीं करना चाहिए वरना गर्भनाश जैसा दोष लग सकता है, तो चलिए जानते हैं क्या  है वो काम 

मां कूष्मांडा करती है संतान की रक्षा करती 

मां कूष्मांडा ना सिर्फ गर्भ में पले रहे शिशु की बल्कि जन्म के बाद भी संतान की रक्षा करती हैं. मां कूष्मांडा को बैमाता, कृत्तिका और छठी मईया का नाम भी दिया गया है, ऐसे में नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा का विधान है और इस दिन महिलाओं को एक गलती बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए वरना आपका व्रत खंडित हो सकता है साथ ही गर्भनाश का दोष भी लग सकता है.

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महिलाओं को नहीं काटना चाहिए कद्दू

नवरात्रि के चौथे दिन यानी आज के दिन महिलाओं को कद्दू नहीं काटना चाहिए और ध्यान रहे कि पूरा गोल कद्दू ना काटे. कई जगहों पर कद्दू कोकोहड़ा, भतुआ और पेठा आदि जैसे नामों से भी जाना जाता है. कद्दू के अलाना कोई भी बड़ा या साबुत फल जैसे- नारियल, गोल वाली लौकी, पपीता और खरबूजा आदि भी नहीं काटना चाहिए, क्योंकि कहा जाता है कि इन फलों में मां कूष्मांडा का वास होता है, इसलिए नवरात्रि के चौथे दिन इन फलों को गलती से भी नहीं काटना चाहिए आइये जानते हैं इसके पीछे का क्या कॉन्सेप्ट है.

क्यों नहीं काटना चाहिए कद्दू 

लोक मान्यताओं के अनुसार कद्दू को पुत्र माना जाता है. इसलिए आज के दिन कद्दू को काटना संतान की बलि देने के सामान माना जाता है. इसलिए आज के दिन ध्यान रहे ति गोल और बड़े कद्दू में पहले पुरुष उसमें चीरा लगाए, उसके बाद ही महिलाएं उसे काटे है. इसके अलावा कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार, जहां पशुबलि नहीं दी जाती, वहां कद्दू को पशु मानकर उसे काटा जाता है. 

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