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Ghar mein diya jalane ka tarika: घर में दीया जलाने का सही तरीका क्या है? जानें इसके नियम और धार्मिक महत्व

घर में दीया जलाना भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है.

By: Ranjana Sharma | Last Updated: February 12, 2026 5:52:06 PM IST



Ghar mein diya jalane ka tarika: भारतीय संस्कृति में दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है. घर के मंदिर में सुबह-शाम दीया जलाना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि दीपक की लौ अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान और सुख-समृद्धि का प्रकाश फैलाती है. हालांकि, शास्त्रों और परंपराओं में दीया जलाने के कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है.

घर में इस जगह जलाना चाहिए दीया 

सबसे पहले स्थान का ध्यान रखना जरूरी है. दीया हमेशा घर के मंदिर, पूजा स्थल या साफ-सुथरी और पवित्र जगह पर जलाना चाहिए. कई लोग मुख्य द्वार पर भी संध्या के समय दीपक जलाते हैं, जिसे लक्ष्मी जी के स्वागत का प्रतीक माना जाता है. ध्यान रहे कि दीपक ऐसी जगह रखा हो जहां हवा से तुरंत बुझने की संभावना न हो.

दीपक की लौ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना होता है शुभ

दीपक किस दिशा में रखा जाए, इसे भी महत्वपूर्ण माना गया है. परंपरागत मान्यता के अनुसार पूजा के दौरान दीपक की लौ पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है. पूर्व दिशा ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि उत्तर दिशा को समृद्धि से जोड़ा जाता है. दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखने से आमतौर पर परहेज किया जाता है, सिवाय विशेष धार्मिक कार्यों के. तेल या घी का चुनाव भी परंपरा से जुड़ा है. देवी-देवताओं की पूजा में शुद्ध घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि घी का दीपक वातावरण को पवित्र करता है और मानसिक शांति देता है. वहीं सरसों के तेल का दीपक नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और शनि संबंधित दोषों की शांति के लिए जलाया जाता है. बाती हमेशा रुई की होनी चाहिए और उसे साफ हाथों से तैयार करना चाहिए.

सूर्यास्त के बाद दीपक जलाना होता है विशेष फलदायी

दीपक जलाने का समय भी तय माना गया है. प्रातःकाल सूर्योदय के समय और संध्या में सूर्यास्त के बाद दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है. संध्या समय का दीपक अंधकार के प्रवेश से पहले घर में प्रकाश और सकारात्मकता बनाए रखने का प्रतीक है. कई घरों में अखंड ज्योति जलाने की भी परंपरा है, लेकिन इसके लिए विशेष सावधानी और नियमित देखभाल जरूरी होती है. एक और महत्वपूर्ण नियम यह है कि दीपक को फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए. यदि किसी कारणवश दीपक बुझाना हो तो उसे हाथ या किसी ढक्कन से धीरे से शांत किया जाता है. इसे श्रद्धा और सम्मान का भाव माना जाता है.

वैज्ञानिक नजरिए से भी है लाभकारी

धार्मिक मान्यता के अनुसार नियमित रूप से दीपक जलाने से घर में सुख-शांति बनी रहती है, मन एकाग्र होता है और वातावरण सकारात्मक रहता है. वैज्ञानिक दृष्टि से भी दीपक की लौ पर ध्यान केंद्रित करने से मानसिक तनाव कम होता है और मन शांत होता है. स्पष्ट है कि दीया जलाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली का हिस्सा है. सही विधि और श्रद्धा के साथ जलाया गया दीपक घर में उजाला ही नहीं, बल्कि आत्मिक संतुलन भी लेकर आता है.

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