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Ramadan 2026: रमजान में औरतों के लिए खास नियम! पीरियड्स में रोजा रखना ‘जायज या हराम’ ? क्या कहता है इस्लाम

Islamic Rules: कुछ ही दिनों में रमज़ान का पवित्र महीना शुरू होने वाला है और लोग 1 महीने तक रोजे रखने वाले हैं. इस बार रमजान 19 फरवरी 2026 से शुरू होने जा रहे हैं. साथ ही आपको बता दें कि रोज़ा सूरज उगने से लेकर सूरज डूबने तक रखा जाता है.

By: Heena Khan | Published: February 11, 2026 1:14:48 PM IST



Islamic Rules: कुछ ही दिनों में रमज़ान का पवित्र महीना शुरू होने वाला है और लोग 1 महीने तक रोजे रखने वाले हैं. इस बार रमजान 19 फरवरी 2026 से शुरू होने जा रहे हैं. साथ ही आपको बता दें कि रोज़ा सूरज उगने से लेकर सूरज डूबने तक रखा जाता है, जिसके बाद वो कुछ भी खा-पी सकते हैं, रोज़े से पहले खाने को सेहरी कहा जाता है. वहीं रोज़े के बाद खाने को इफ्तार. साथ ही बता दें कि रमज़ान के दौरान लोग 5 वक़्त की नमाज़ पढ़ते हैं और गरीबों और ज़रूरतमंदों की मदद करते हैं. 

महिलाओं के मन में उठता है ये सवाल 

आपको बता दें कि इस्लाम में रोज़े रखने के कुछ खास नियम हैं, लेकिन कुछ लोगों को रोज़े से छूट दी गई है. अगर रोज़ा रखते हैं, तो कुछ बातों का खास ख्याल रखना पड़ता है, नहीं तो रोज़ा गलत माना जाता है. वहीं ऐसे में पीरियड्स को लेकर भी महिलाओं के लिए कई नियम हैं, वहीं ऐसे में कई मुस्लिम महिलाओं के मन में सवाल उठते हैं कि क्या पीरियड्स के दौरान रोज़ा रख सकते हैं? आइए इस्लामी नियमों के आधार पर इस सवाल का जवाब जान लेते हैं. 

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क्या कहता है इस्लाम? 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिस औरत को पीरियड्स हो रहे हों, उसके लिए रोज़ा रखना जायज़ नहीं है. जब किसी औरत को लगे कि उसका पीरियड आने वाला है, तो वो रोज़ा रोक सकती है, और जब वो खत्म हो जाए, तो उसे जितने दिन छूटे थे उतने दिन रोज़ा रखना होगा. ऐसा न करना गुनाह माना जाता है. लेकिन, अगर पीरियड्स खत्म होने के बाद फिर से शुरू हो जाते हैं, तो भी यही नियम लागू होते हैं.

फज्र की नमाज ज़रूरी 

अगर किसी औरत ने पिछली रात, यानी फज्र की नमाज़ से पहले रोज़ा रखने का इरादा नहीं किया है, तो उसका रोज़ा सही नहीं माना जाता है. अगर कोई औरत अगले दिन रोज़ा रखने का इरादा करती है और कहती है, “अगर उसका पीरियड आया, तो मैं अपनी कसम तोड़ दूँगी,” तो इसमें कोई एतराज़ नहीं है, और यह इरादे को लंबा खींचना नहीं है; बल्कि, उसका रोज़ा रखने का इरादा पक्का है. अगर कोई जानबूझकर उल्टी करता है, तो उसका रोज़ा टूट जाता है. अगर कोई सच में बीमार है और रोज़े के दौरान उल्टी करता है, तो उसका रोज़ा नहीं टूटता है. इसलिए, वे दूसरे दिनों में उपवास की संख्या पूरी कर सकते हैं.

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