Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज, एक हिंदू तपस्वी और गुरु हैं, जो राधावल्लभ संप्रदाय को मानते हैं. प्रेमानंद जी महाराज अपनी भक्ति, सरल जीवन, और मधुर कथाओं के लिए लोगों में काफी प्रसिद्ध हैं. हर रोज लोग उनके कार्यक्रम में शामिल होते हैं जहां वह लोगों के सवालों के जवाब देते हैं.हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं. उनके प्रवचन, जो दिल को छू जाते हैं, ने उन्हें बच्चों और युवाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया है. प्रेमानंद जी महाराज नाम जप करने के लिए के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं और साफ मन से अपने काम को करें और सच्चा भाव रखें.
प्रेमानंद जी महाराज ने भक्त के सवाल पर प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि चिंताओं से मुक्ति कैसे मिले.
चिंतन के द्वारा चिंता कम की जा सकती है. यदि हम भगवत चिंतन करते हैं तो संसार की, देह की ना ना प्रकार के विषयों की चिंताएं अपने आप नष्ट हो जाएगी. भगवान का चिंतन, हरि स्मृति, भगवान का स्मपरण, चिंताओं, समस्त शोकों का नाश कर देता है.
सबसे प्रार्थना है कि चिंता, भय, शोक, विशाद, वासनाएं यह सबसे मन में हैं, जो जितना आध्यात्म से जुड़ेगा वो उतना ही बच पाएगा. वरना यह सबसे मन को खंचती रहती है. जीव किंचन मात्र जहां सुख नहीं है ऐसे विषयों में भूला हुआ सुख का अनुभव करने के लिए और चिंता और शोक भय को बढ़ाता चला जाता है. हम सोचे हैं कि धन से सुख शांति मिल जाएगी, भोगों से मिल जाएगी, लेकिन नहीं यह गलता है. जब तक भगवान की शरण में नहीं जाओगे, भगवान का चिंतन नहीं करोगे तब तक चिंताओं से मुक्त नहीं हो सकते.
जो इनको चरणों की शरण में हो जाता है उनकी समस्त चिंताएं भगवान मिटा देते हैं. अगर हम श्री श्याम की शरण में हो जाते हैं, उनका नाम जप करते हैं तो कोई चिंता नहीं रह जाएगी. सबसे बड़ी साधना, आराधना, आध्यात्म भगवत चिंतन होना है.
अर्जुन ने कहां है कि- ”नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत।” हमरा शोक, मोह नष्ट हो गया और भगवत स्मृति जाग गई है. इसीलिए चिंता का नाश करने के लिए चिंता मणि भगवान का नाम लें.
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