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Premanand Ji Maharaj: दुख आने पर साधक को कैसी भावना रखनी चाहिए, जानें प्रेमानंद जी महाराज से

Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल वचन लोगों को उनके जीवन के प्रेरित करते हैं. नाम जप, भगवान की सेवा, माता-पिता की सेवा करना ही परम सेवा है. जानते हैं प्रेमानंद जी महाराज से दुख आने पर साधक को कैसे भावना रखनी चाहिए.

Published by Tavishi Kalra

Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज, एक हिंदू तपस्वी और गुरु हैं, जो राधावल्लभ संप्रदाय को मानते हैं. प्रेमानंद जी महाराज अपनी भक्ति, सरल जीवन, और मधुर कथाओं के लिए लोगों में काफी प्रसिद्ध हैं. हर रोज लोग उनके कार्यक्रम में शामिल होते हैं जहां वह लोगों के सवालों के जवाब देते हैं.हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं. उनके प्रवचन, जो दिल को छू जाते हैं, ने उन्हें बच्चों और युवाओं सहित विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया है. प्रेमानंद जी महाराज नाम जप करने के लिए के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं और साफ मन से अपने काम को करें और सच्चा भाव रखें.

भक्त के सवाल पर प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि दुख आने पर साधक को कैसे भावना रखनी चाहिए.

प्रेमानंद जी महाराज का मानना है कि जो हमारे अशुभ कर्म है उसके परिणाम से दुख की प्राप्ति है, और शुभ कर्म से सांसारिक सुख की प्राप्ति होती है. शुभ और अशुभ दोनों को नष्ट करने के लिए मानव जीवन मिला है. दुख को भोग कर नष्ट कर दें और सुख को बांटकर.

विचार करें, जो हमारे अशुभ और बुरे कर्म है वो निपट रहे हैं. अब हम पवित्र हो रहे हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब आप नाम जप करते हैं. प्रभु का प्रताप और कृपा प्रसाद हमारे ऊपर है तो हम तो हम बड़े से बड़े दुख को काट सकते हैं और यदि प्रभु से नहीं जुड़े तो नेगेटिव विचार और दुख हमे नष्ट कर देंगे, हमको जला देंगे. दुख और नकारात्मक सोच हमाको मार रहे हैं. सुख है और सकारात्मक सोच है तो हम बच जाएंगे. दुख को सहने का सामर्थ केवल नाम जप से आता है, दुख प्राकृतिक आता है, शरीर में पीड़ा, शरीर में रोग, परिवार में विपत्ति, लाभ-हानि यही सब दुख हैं. सांसरिक दुख हैं यह सब. 

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