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18 बार पराजित होने वाला भगवान कृष्ण का सबसे शक्तिशाली शत्रु जो दो रानियों से जन्मा था

ऊगवान श्री कृष्ण की लीला अपरमपार हैं. आज जानते हैं भगवान श्री कृष्ण का सबसे बड़ा शत्रु कौन था जिसने 1 नहीं 2 नहीं बल्कि 18 बार आक्रमण किया था. साथ ही यह कोई साधारण बालक नहीं बल्कि दो रानियों के शरीर से जन्मां था यह बालक, जानें यह अद्भुत कथा.

Published by Tavishi Kalra

Jarasandha: जरासन्ध महाभारत का एक खलनायक था. जरासन्ध बृहद्रथ वंश के संस्थापक राजा बृहद्रथ के पुत्र थे. जरासंध मगध (वर्तमान बिहार) का राजा और मथुरा के राजा कंस का ससुर था.

जरासंध के पिता, राजा बृहद्रथ, की काशी के राजा की जुड़वां बेटियों से शादी हुई. बृहद्रथ अपनी दोनों पत्नियों से समान रूप से प्रेम करते थे, लेकिन उनके कोई पुत्र नहीं थे. ऋषि चंदकौशिका उनके राज्य में आए और राजा को वरदान के रूप में फल दिया. राजा ने फल को अपनी दोनों पत्नियों में बराबर बांट दिया. शीघ्र ही, दोनों पत्नियां गर्भवती हुईं और उन्होंने मानव शरीर के दो हिस्सों को जन्म दिया.

ये दो निर्जीव हिस्से देखकर राजा डर गए और उन्हें वन में फेंक दिया. जरा नामक एक असुर ने उन दो हिस्सों को पाया और एक को अपने दाहिने हाथ से और दूसरे को अपने बाएं हाथ से उठाकर अपनी हथेली में रखा. जब उसने अपनी दोनों हथेलियों को मिलाया, तो दोनों हिस्से जुड़ गए और एक जीवित बच्चा बन गया. जरा जीवित बच्चे को को राजा के पास ले गई ,पिता अपने बेटे को देखकर बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने असुरी जरा के नाम पर अपने बच्चे का नाम जरासंध रखा.

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मथुरा के शासक कंस ने जरासंध का ध्यान आकर्षित किया. उसकी वीरता से प्रभावित होकर जरासंध ने अपनी दो पुत्रियों का विवाह कंस से कराकर उसे अपना दामाद बना लिया. कंस कृष्ण का मामा था. भगवान श्री कृष्ण ने दिव्य भविष्यवाणी के अनुसार कंस का वध किया. अपनी पुत्रियों के विधवा हो जाने से जरासंध क्रोधित हो गया. इसके बाद जरासंध ने कृष्ण से बदला लेने की प्रतिज्ञा की.

जरासंध ने मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया और कृष्ण द्वारा पराजित हुआ. जरासंध मथुरा पर लगातार आक्रमण करता रहता है. अंत में भीम ने जरासंध को टांगों से पकड़कर उसे दो भागों में फाड़ दिया, उन्होंने दोनों भागों को विपरीत दिशाओं में दूर फेंक दिया, जिससे वे फिर से जुड़ न सकें और जरासंध की मृत्यु न हो सके.

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