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Karwa Chauth Sargi Time 2025: करवा चौथ पर जानें सरगी खाने का शुभ मुहूर्त और महत्व

Karwa Chauth 2025: करवा चौथ का त्योहार इस साल 10 अक्टूबर को है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार करवा चौथ करने से पति-पत्नी के रिश्ते मजबूत होते हैं. इस दिन सरगी (Karwa Chauth Sargi 2025) की परंपरा भी निभाई जाती है. तो ऐसे में जानते हैं इसका महत्व क्या है?

Published by Shivi Bajpai

Karwa Chauth 2025: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत विशेष पर्व होता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य सुख की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं. व्रत की शुरुआत सरगी से होती है, जो कि व्रत का सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है. इस साल करवा चौथ 2025 का व्रत 9 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा. आइए जानते हैं सरगी का शुभ मुहूर्त, इसका महत्व और इससे जुड़ी परंपराएं.

सरगी का शुभ मुहूर्त 2025 में

पंचांग के अनुसार, करवा चौथ के दिन चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर को सुबह 6:13 बजे से आरंभ होकर रात 8:47 बजे तक रहेगी. चूंकि सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है, इसलिए सरगी का शुभ समय प्रातः 4:30 बजे से लेकर सूर्योदय (लगभग 6:13 बजे) तक का रहेगा. इस समय के भीतर व्रती महिलाओं को अपनी सरगी का सेवन कर लेना चाहिए. सरगी खाने के बाद दिन भर महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं.

सरगी का महत्व

सरगी केवल भोजन नहीं, बल्कि प्रेम, आशीर्वाद और परंपरा का प्रतीक है. शादीशुदा महिलाओं को उनकी सास सरगी देती हैं, जिसे सास का आशीर्वाद और प्रेम का प्रतीक माना जाता है. इसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे, सेवईं, पराठा, नारियल, और मीठा पानी (शरबत या दूध) शामिल होते हैं. परंपरा के अनुसार, सास अपनी बहू को यह सरगी सूर्योदय से पहले देती हैं ताकि वह दिनभर व्रत के दौरान ऊर्जावान रह सके.

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सरगी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

मान्यता है कि सरगी का सेवन देवी पार्वती की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है. कहा जाता है कि माता पार्वती ने भी भगवान शिव के लिए इसी प्रकार व्रत रखा था. इसलिए करवा चौथ की सरगी को देवी पार्वती के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है. जो महिलाएं सच्चे मन से व्रत करती हैं, उन्हें वैवाहिक जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि प्राप्त होती है.

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सरगी खाने के बाद क्या करें?

सरगी खाने के बाद महिलाएं पूरे दिन जल तक ग्रहण नहीं करतीं. दिनभर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा, करवा माता की आराधना और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों से जल पीकर व्रत का पारण करती हैं.

करवा चौथ की सरगी न सिर्फ व्रत की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि यह परिवार में प्रेम, सम्मान और संबंधों की गहराई को दर्शाती है. इसलिए इस बार 9 अक्टूबर 2025 को शुभ मुहूर्त में सरगी खाकर मां पार्वती का आशीर्वाद अवश्य लें और अपने वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का स्वागत करें.

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Shivi Bajpai

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