Home > धर्म > Holi Traditions: पहली होली मायके में क्यों मनाती हैं नवविवाहित? जानिए वजह, क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं

Holi Traditions: पहली होली मायके में क्यों मनाती हैं नवविवाहित? जानिए वजह, क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं

Holi Traditions: होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी, जबकि एक दिन पहले होलिका दहन होगा. भारतीय परंपरा के अनुसार, शादी के बाद पहली होली नवविवाहित दुल्हन अपने ससुराल में नहीं बल्कि मायके में मनाती है. इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं, सास-बहू से जुड़ी परंपराएं और ज्योतिषीय कारण बताए जाते हैं.

By: Ranjana Sharma | Last Updated: February 25, 2026 11:23:31 AM IST



Holi Traditions: रंगों का त्योहार होली इस साल 4 मार्च 2026 को पूरे देश में उल्लास के साथ मनाया जाएगा. इसके एक दिन पहले होलिका दहन की रस्म निभाई जाएगी. होली जहां खुशियों और मेल-मिलाप का पर्व है, वहीं इससे जुड़ी कई पारंपरिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं. इन्हीं में से एक खास परंपरा नवविवाहित दुल्हनों से जुड़ी है.

नवविवाहिता ससुराल में नहीं मनाती है होली

भारतीय परंपरा के अनुसार शादी के बाद पहली होली अधिकतर नवविवाहिता अपने ससुराल में नहीं बल्कि मायके में मनाती हैं. कई परिवारों में यह रिवाज आज भी निभाया जाता है. जैसे ही होलाष्टक शुरू होते हैं या होलिका दहन का समय करीब आता है, नई बहू को उसके मायके भेज दिया जाता है ताकि वह वहां अपने माता-पिता और परिवार के साथ यह पर्व मना सके.

सास-बहू नहीं देखती होलिका दहन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवविवाहित बहू और उसकी सास को एक साथ जलती हुई होली नहीं देखनी चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से रिश्तों में तनाव या मनमुटाव आ सकता है. हालांकि यह मान्यता आस्था पर आधारित है, लेकिन कई परिवार इसे गंभीरता से निभाते हैं.

होलिका दहन की यह है कथा

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. पौराणिक कथा के अनुसार भक्त प्रह्लाद की रक्षा और होलिका के दहन की घटना इस पर्व का आधार है. अग्नि को शुद्धिकरण का प्रतीक माना जाता है, लेकिन नई शादी के तुरंत बाद “दहन” से जुड़े किसी भी प्रतीक को कुछ लोग वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं मानते. इसी वजह से पहली होली पर बहू को मायके भेजने की परंपरा चली आ रही है.

ज्योतिषीय दृष्टि से क्या है कारण?

ज्योतिष शास्त्र में विवाह का पहला वर्ष बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना गया है. फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन होता है और इस समय अग्नि तत्व का प्रभाव अधिक सक्रिय माना जाता है. नई बहू को घर की लक्ष्मी और नए सौभाग्य का प्रतीक समझा जाता है. कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि यदि ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अनुकूल न हो तो अग्नि तत्व का प्रभाव दांपत्य जीवन पर असर डाल सकता है. इसलिए एहतियात के तौर पर नवविवाहिता को इस समय अपने मायके में रहने की सलाह दी जाती है, ताकि वैवाहिक जीवन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ हो.

Advertisement