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Vastu Guru Manyyaa Exclusive : गणपति घर लाने से पहले जान लो मूर्ति की सूंड और मुद्रा का असली राज

Ganesh Chaturthi 2025: आज का दिन गणपति बप्पा का जन्म हुआ था। तभी तो लोग इस दिन गणेश जी को घर लाकर उनकी स्थापना करते हैं और दस दिन तक खूब भक्ति और उत्सव मनाते हैं।

Published by Preeti Rajput

Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) का त्योहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। इसे गणेश उत्सव (Ganesh Utsav) और विनायक चतुर्थी भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी दिन गणपति बप्पा का जन्म हुआ था। तभी तो लोग इस दिन गणेश जी को घर लाकर उनकी स्थापना करते हैं और दस दिन तक खूब भक्ति और उत्सव मनाते हैं।

इस बार भी महाराष्ट्र से लेकर कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश तक हर जगह गणपति बप्पा मोरया के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। लेकिन जब बात मूर्ति स्थापना की आती है, तो सबके मन में यही सवाल होता है – गणेश जी की मूर्ति कैसी होनी चाहिए? सूंड किस तरफ होनी चाहिए? बैठी हुई मूर्ति लें या खड़ी हुई? आइए जानते हैं।

दाईं सूंड वाले गणेश जी

अगर गणेश जी की सूंड दाईं तरफ हो तो उन्हें सिद्धिविनायक कहा जाता है। इनकी पूजा थोड़ी कठिन मानी जाती है, क्योंकि इसमें सख्त नियम और अनुष्ठान करने पड़ते हैं। कहते हैं कि इनकी पूजा करने से आयु बढ़ती है और मृत्यु का भय कम होता है। लेकिन घर के लिए यह मूर्ति उतनी सही नहीं मानी जाती। आमतौर पर ऐसे गणेश जी की पूजा मंदिरों या साधकों द्वारा की जाती है।

बाईं सूंड वाले गणेश जी

गृहस्थ जीवन वाले लोगों के लिए बाईं सूंड वाले गणपति सबसे शुभ माने जाते हैं। इनकी पूजा आसान होती है और इसे घर पर कोई भी कर सकता है। बस फूल, दीपक, प्रसाद और आरती से गणपति बप्पा खुश हो जाते हैं। इसलिए घर पर स्थापना के लिए इन्हें ही ज्यादा अच्छा माना गया है।

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बैठी हुई या खड़ी मूर्ति

अगर घर में गणेश जी ला रहे हैं तो बैठी हुई मुद्रा वाली मूर्ति लेना ज्यादा शुभ होता है। खड़े गणेश जी को चलायमान माना जाता है, यानी लंबे समय तक स्थिर सुख-शांति नहीं मिल पाती। बैठी हुई मूर्ति बुद्धि और मन को स्थिर रखने का प्रतीक है।

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चूहा और ऋद्धि-सिद्धि

गणेश जी की मूर्ति के नीचे उनका वाहन चूहा जरूर होना चाहिए। इसे शुभ माना गया है। साथ ही अगर मूर्ति में ऋद्धि-सिद्धि भी हों, तो घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य आता है। ध्यान रहे, मिट्टी की मूर्ति सबसे अच्छी मानी जाती है, क्योंकि यह शुद्ध और प्राकृतिक होती है।

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