Dasha Mata ki kahani: हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और पर्व हैं, जो जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता लाने के लिए किए जाते हैं. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण व्रत दशा माता व्रत है, जिसे घर की ‘दशा’ यानी स्थिति को सुधारने वाला माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने से घर की दरिद्रता दूर होती है, आर्थिक समस्याएं कम होती हैं और किस्मत के बंद दरवाजे भी खुलने लगते हैं. विशेष रूप से महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली, उन्नति और बच्चों की सलामती के लिए यह व्रत रखती हैं.
कब है दशा माता व्रत 2026
साल 2026 में दशा माता व्रत 13 मार्च, शुक्रवार को मनाया जाएगा. यह व्रत हर साल चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को किया जाता है. खास बात यह है कि यह पर्व होली दहन के ठीक दसवें दिन मनाया जाता है. इस दिन महिलाएं पूरे विधि-विधान के साथ दशा माता की पूजा करती हैं और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं.
भगवान विष्णु से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशा माता को भगवान विष्णु के स्वरूप से जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि यदि किसी घर की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही हो, बनते हुए काम रुक जाते हों या घर में कलह का माहौल रहता हो, तो दशा माता का व्रत करना अत्यंत फलदायी होता है. यह व्रत परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है.
कच्चे सूत का महत्व
दशा माता व्रत में कच्चे सूत का डोरा विशेष महत्व रखता है. इस दिन महिलाएं कच्चे सूत का एक धागा लेती हैं और उसमें 10 गांठें लगाती हैं. इसे ‘दशा माता का डोरा’ कहा जाता है. यह डोरा जीवन की दसों दिशाओं में सुख-समृद्धि और रक्षा का प्रतीक माना जाता है.
पीपल के पेड़ की पूजा
दशा माता व्रत के दिन पीपल के पेड़ की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है. महिलाएं सूत का डोरा लेकर पीपल के पेड़ की 10 बार परिक्रमा करती हैं और डोरी को पेड़ पर लपेटती हैं. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.
एक समय का भोजन और व्रत के नियम
इस व्रत में महिलाएं पूरे दिन में केवल एक समय भोजन करती हैं. खास बात यह है कि यह भोजन बिना नमक का होता है. भोजन में मुख्य रूप से गेहूं से बने व्यंजन शामिल किए जाते हैं. इस व्रत में सादगी और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है. दशा माता व्रत के दिन घर की साफ-सफाई का भी विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन महिलाएं घर से पुराने झाड़ू या बेकार कचरे को बाहर निकालती हैं. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और मां लक्ष्मी का वास होता है.
नल-दमयंती की कथा सुनना जरूरी
दशा माता व्रत की पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती, जब तक दशा माता की कथा न सुनी जाए. इस दिन विशेष रूप से राजा नल और रानी दमयंती की कथा सुनी जाती है. माना जाता है कि इस कथा को सुनने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं.

