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Bangladesh Shakti Peeths: बांग्लादेश में हैं माता के यह प्रमुख 7 शक्ति पीठ, जानें इन पावन मंदिरों के नाम और इनका रहस्य

Bangladesh Shakti Peeths: बांग्लादेश में माता सती के प्रमुख मंदिर विराजमान हैं. इन मंदिरों में दर्शन के लिए भारत से भी लोग जाते हैं. इनमें से कई मंदिरों में तंत्र साधना भी की जाती है. जानते हैं बांग्लादेश के प्रमुख मंदिर कौन से हैं और क्या हैं इनका महत्व.

By: Tavishi Kalra | Last Updated: January 7, 2026 12:13:33 PM IST



Bangladesh Shakti Peeths: शक्तिपीठ एक पवित्र स्थान माना गया है. शक्तिपीठ वो स्थान है जहां माता सती के शरीर के अंग, वस्त्र और आभूषण गिरे थे. कुल 51 या 52 शक्तिपीठ बताई गई है. जो भारत और उसके आसपास के पड़ोसी देशों में विराजमान हैं. माता के इन मंदिरों को शक्ति साधना का प्रमुख स्थल माना जाता है. जानते हैं पड़ोसी देश बांग्लादेश में माता के कौन-से प्रमुख शक्तिपीठ स्थिति हैं और क्या हैं उनके नाम.

एक बार सती अपने पिता के घर यज्ञ पर गईं वहां अपने पति के अपमान से दुखी होकर उन्होंने आत्मदाह कर लिया था. भगवान शिव सती के शव को लेकर क्रोधित होकर तांडव करने लगे, जिससे प्रलय की स्थिति उत्पन्न हो गई. विश्व को बचाने के लिए, भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड कर दिया. जिन-जिन स्थानों पर सती के शरीर के अंग, वस्त्र या आभूषण गिरे, वे ही स्थान शक्तिपीठ कहलाए. 

जानते हैं बांग्लादेश के उन ऐसतिहासिक मंदिरों के बारे में जहां बनें हैं माता के शक्तिपीठ. इन शक्तिपीठों में जेसोरेश्वरी, सुगंधा, चट्टल मां भवानी, जयंती, महालक्ष्मी, श्रावणी और अपर्णा शक्तिपीठ शामिल हैं. माता रानी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं. बांग्लादेश में माता के 7 शक्तिपीठ विराजमान हैं.

जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ

जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ (Jeshoreshwari Shaktipeeth) बांग्लादेश के सतखीरा जिले के श्यामनगर उप-जिले के ईश्वरीपुर गाँव में स्थित एक प्राचीन हिंदू मंदिर है. यह मंदिर देवी काली को समर्पित है और शक्तिपीठों में से एक है.ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती की हथेलियां गिरी थीं. इस मंदिर में ‘जेसोरेश्वरी’ देवी की पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही इस मंदिर में भगवान शिव ‘चंद्र’ के रूप में प्रकट होते हैं, जो भक्तों के सभी भय और कष्टों को दूर करते हैं. इस मंदिर की सुंदरता देखते ही बनती है, इस मंदिर में वास्तुकला का अद्भुत वर्णन किया गया है.

सुगंधा शक्तिपीठ

सुगंधा शक्तिपीठ बांग्लादेश के बारिसल के पास शिकारपुर गांव में स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है. इस मंदिर में देवी सुनंदा और भैरव त्र्यंबक की पूजा होती है. इस मंदिर में भी देवी सती के शरीर के अंग गिरने से बने 51 शक्तिपीठों में से एक है. मान्यता है इस मंदिर में देवी सती की नाक गिरी थी. महाशिवरात्रि पर इस मंदिर में भव्य उत्सव का आयोजन किया जाता है. यह मंदिर पत्थर का बना है और अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है.

चट्टल मां भवानी शक्तिपीठ

चट्टल मां भवानी शक्तिपीठ (Chattal Bhawani Shakti Peeth) बांग्लादेश के चिट्टागोंग (चटगांव) जिले में चंद्रनाथ पर्वत शिखर पर स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है. मान्यताओं और कथाओं के अनुसार इस मंदिर में देवी सती का दाहिना हाथ गिरा था. इसलिए इसे भवानीपुर शक्तिपीठ भी कहते हैं. इस मंदिर में काली माता की पूजा-अर्चना की जाती है. इसे भवानी शक्तिपीठ, चट्टल शक्तिपीठ, या चंद्रनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.

जयंती शक्तिपीठ

जयंती शक्तिपीठ बांग्लादेश के सिलहट जिले में अवस्थित है. यह 51 शक्तिपीठों में से एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है, जहाँ पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी सती की वाम जंघा (बायां पैर) गिरी थी, इसलिए यहाँ देवी को ‘जयंती’ और भगवान शिव को ‘क्रमदीश्वर’ (या क्रमाशिश्वर) के रूप में पूजा जाता है. यह मंदिर 600 साल पुराना है. 

महालक्ष्मी शक्तिपीठ

बांग्लादेश में महालक्ष्मी शक्तिपीठ (श्री शैल महालक्ष्मी ग्रीवा पीठ) सिल्हैट (Sylhet) के पास जॉइनपुर गांव (Joinpur Village) में स्थित है. माना  जाता है इस मंदिर में देवी सती की गर्दन का हिस्सा गिरा था, इसलिए इसे महालक्ष्मी और भैरव (संवरणानंद) के रूप में पूजा जाता है. यह 51 शक्तिपीठों में से एक है, जो बांग्लादेश के कई अन्य शक्तिपीठों (जैसे ढाकेश्वरी और सुगंधा) के साथ महत्वपूर्ण है.

श्रावणी शक्तिपीठ 

श्रावणी शक्तिपीठ बांग्लादेश में कुमीरा, चटगांव, बांग्लादेश के पास स्थित है. इस मंदिर में देवी सती की रीढ़ की हड्डी गिरी थी. इस मंदिर में देवी को सर्वाणी/श्रावणी रूप में और भैरव को निमिषवैभव के रूप में पूजा जाता है, और यह स्थान तंत्र साधना के लिए विशेष महत्व रखता है.  इस मंदिर में दर्शन के लिए भारत से भई लोग आते हैं.

अपर्णा शक्ति पीठ

अपर्णा शक्ति पीठ बांग्लादेश के शेरपुर जिले के भवानीपुर गांव में करतोया नदी के तट पर स्थित एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है. इस मंदिर में देवी सती के शरीर का बायां पैर गिरा था, और यहां देवी भवानी/अपरणा (काली) की पूजा होती है. 

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