कैसी यह रीत…दुल्हन लेकर जाती बरात और दूल्हे की होती है विदाई, अजब-गजब है रस्म

Weird Rituals: भारत में एक ऐसा गांव है, जहां दुल्हन बरात लेकर दूल्हे के घर पहुंचती है. इतना ही नहीं, दुल्हन की जगह दूल्हे की विदाई भी होती है.

Published by Prachi Tandon

Traditional and Weird Rituals: भारतीय शादियां अपनी अनोखी रस्मों के लिए जानी जाती हैं. हर क्षेत्र की परंपराओं के कुछ अलग रंग और भाव होते हैं, जो सुनने और देखने में अजीब लग सकते हैं. इन्हीं अलग-अलग परंपराओं और अनोखी रस्मों में उत्तराखंड के एक गांव की शादी भी शामिल है. जहां आमतौर पर शादी में दूल्हा बरात लेकर दुल्हन के घर जाता है, वहां उत्तराखंड के एक गांव में यह रीत उलट होती है. जी हां, दुल्हन सज-धजकर और बरात लेकर दूल्हे के घर जाती है और शादी करती है. इतना ही नहीं, इस शादी में दुल्हन की नहीं बल्कि दूल्हे की विदाई होती है. 

दुल्हन लेकर जाती है दूल्हे के घर बरात

उत्तराखंड के देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र में शादियों में जोजोड़ा नाम की परंपरा निभाई जाती है. इस परंपरा को सदियों से निभाया जा रहा है और इसे सामाजिक समानता, सांस्कृतिक गरिमा और परिवारिक सम्मान का प्रतीक माना जाता है. यह परंपरा इसलिए बनाई गई है क्योंकि, यहां शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि परिवारों का मिलन माना गया है. 

कुछ लोगों के लिए उत्तराखंड की जोजोड़ा परंपरा अजीब हो सकती है, लेकिन स्थानीय लोगों में आज भी इसे बड़े मान-सम्मान और गर्व की बात माना जाता है. 

महिला और पुरुषों को माना जाता है बराबर

जोजोड़ा रस्म यह साबित करती है कि महिला और पुरुष, दोनों ही एक बराबर हैं. जितनी बरात लाने पर दूल्हे को अहमियत दी जाती है, उतनी ही दुल्हन का परिवार भी पाने का अधिकार होता है. ऐसे में जोजोड़ा रस्म अपनाई जाती है और बिल्कुल दूल्हे के परिवार की तरह ही दुल्हन के साथ परिवार का स्वागत होता है. 

जोजोड़ा रस्म से माना जाता है कि इससे प्राचीन समय से ही महिलाओं को सम्मान, स्वाभिमान और स्वतंत्रता मिल रही है. 

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कैसे होती है जोजोड़ा रस्म?

जोजोड़ा रस्म में आम शादियों से हटकर होती है. इसमें ढोल, दमाऊं, रणसिंघा और थाली जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्र होते हैं जो शादी को उत्सव की तरह रंगीन बना देते हैं. जोजोड़ा रस्म में शादी के समय जब दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंचती है तो दोनों परिवार के लोग लोकगीतों पर नाचते हैं और आनंद लेते हैं.

कब शुरू हुई थी जोजोड़ा रस्म?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जोजोड़ा रस्म को हजारों साल पुराना माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि जौनसार-बावर एक समय पर महाभारत काल के समय कुरुवंश का हिस्सा था और इस दौरान यहां के समानत का जीवन जीते थे. हालांकि, समय बदला और कई रस्में-रीत बदल गईं. लेकिन जौनसार-बावर में जोजोड़ा आज भी निभाई जाती है. 

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