बाप को 2-2 बार ‘मारा’, आखिर पहली बार कहां कर बैठा था चूक?

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्मशाम घाट की रशीद गुम होने की वजह से बेटे ने पिता का अंतिम संस्कार फिर से कर दिया.

Published by Sohail Rahman

MP News: मध्य प्रदेश के उज्जैन से बेहद हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है. दरअसल, पूरा मामला ये है कि पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनने की वजह से बेटे ने फिर से अंतिम संस्कार की योजना बनाई, लेकिन श्मशान घाट के कर्मचारियों को शक हो गया और उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी. फिर इसका भेद खुल पाया. ये पूरा मामला मध्य प्रदेश के उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट का है. कुछ युवकों ने बिना किसी लाश के श्मशान घाट कार्यालय से लकड़ी, गोबर के कंडे और अन्य सामग्री ली और फर्जी नाम और पता देकर रसीद ले ली. फर्जी दाह संस्कार की रसीद मिलने के बाद वे तुरंत भाग गए. 

श्मशान घाट के कर्मचारियों को हुआ शक

जब ​​काफी देर तक लाश श्मशान घाट नहीं पहुंची तो श्मशान घाट के कर्मचारियों को शक हुआ और उन्होंने जीवाजीगंज थाने में इसकी सूचना दी. यह घटना 16 सितंबर की बताई जा रही है, जब एक बेटा अपने पिता का अंतिम संस्कार करने श्मशान घाट पहुंचा था. हैरानी की बात यह है कि वह कुछ साथियों के साथ श्मशान घाट पहुंचा, लेकिन लाश नहीं थी. अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट से लकड़ी और गोबर के कंडे लिए गए. रसीद बनाते समय मृतक का नाम और पता ध्यान से लिखा जा रहा था. तभी श्मशान घाट के कर्मचारियों को शक हुआ. पूछताछ करने पर सच सामने आ गया. पुलिस को बुलाया गया और बेटे को थाने ले जाया गया.

बेटे ने खोला सारा राज

जब पुलिस वाले ने बेटे से पूछताछ की तो सारा भेद खुला. पूछताछ के दौरान बेटे ने बताया कि उसके पिता लालचंद की मौत एक साल पहले हो चुकी थी. परिवार को असली दाह संस्कार की रसीद नहीं मिली थी, इसलिए उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया. मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना उन्हें समग्र आईडी और प्रॉपर्टी के कागजात नहीं मिल पा रहे थे. इसलिए उन्होंने यह योजना बनाई. पुलिस ने बताया कि बेटे  ने रसीद पर तारीख फर्जी लिखी थी. लालचंद की मौत 15 सितंबर 2024 को और दाह संस्कार 16 सितंबर को होना बताया गया था. बेटे ने यही फर्जी तारीखें इस्तेमाल कीं.

पुलिस ने क्या कहा?

इस पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि अगर इस रसीद का इस्तेमाल जमीन के रिकॉर्ड या बैंक से पैसे निकालने के लिए किया गया तो दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. चक्रतीर्थ प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अशोक प्रजापत ने खोई हुई रसीदों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अगर चक्रतीर्थ से दी गई अंतिम संस्कार की रसीद खो जाती है, तो परिवार एफिडेविट और पहचान पत्र देकर डुप्लीकेट कॉपी ले सकता है. इसके लिए किसी फर्जी काम की जरूरत नहीं है.

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