MP News: मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के लिए सोमवार (09, 2026) का दिन बड़ा साबित हुआ. अगर सबकुछ सही रहा तो आगामी कुछ दिनों के दौरान विधानसभा में भाजपा का एक विधायक बढ़ सकता है. इस तरह अब मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा की सीट 231 हो जाएगी. मध्य प्रदेश में ग्वालियर हाई कोर्ट ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव के मामले में कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन निरस्त कर दिया है. इसके साथ ही भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत को विधायक घोषित कर दिया है.
15 दिन बाद प्रभावी होगा निर्णय
हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया, जिसके बाद रामनिवास रावत को विधायक घोषित कर दिया है. हाई कोर्ट का आदेश 15 दिन के बाद प्रभावी होगा, हालांकि, मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की मोहलत भी दी गई है. यह फैसला जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकल पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दिया.
उपचुनाव में दूसरे स्थान पर थे रामनिवास रावत
कोर्ट के मुताबिक, विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को चुनाव में दूसरे स्थान पर रहने के आधार पर निर्वाचित विधायक घोषित होंगे. यहां पर बता दें कि 2024 में हुए विजयपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के रामनिवास रावत को कांग्रेस ने मुकेश मल्होत्रा ने पराजित किया था. चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी मुकेश मल्होत्रा विजयी घोषित हुए थे.
क्या है आरोप
उधर, चुनाव हारने के बाद रामनिवास रावत ने ग्वालियर हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन के दौरान कई चीजें छिपाईं. उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों से जुड़ी जानकारी छुपाई थी. मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने उनके निर्वाचन को निरस्त कर दिया.
कौन हैं मुकेश मल्होत्रा?
बता दें कि वर्ष 2024 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने रामनिवास रावत को हरा दिया था और विधायक बने थे. नियमानुसार, दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी रामनिवास रावत को अब विजयपुर विधानसभा सीट से विधायक मान लिया गया है. विजयपुर उपचुनाव में रामनिवास रावत को 7364 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था. रामनिवास रावत ने लोकसभा चुनाव से पहले पाला बदलकर बीजेपी का दामन थाम लिया था. भाजपा ज्वाइन करने के बाद उन्हें मोहन कैबिनेट में जगह मिली, लेकिन उपचुनाव में रामनिवास रावत हार गए तो उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा था.