Shopping Addiction: क्या होता है शॉपाहोलिज्म, क्यों लोग हो रहे इसके शिकार, इसका इलाज कैसा होता है?

Shopping Addiction: नीरा जैसी शॉपिंग लत (कम्पल्सिव बायिंग) तनाव और अकेलापन दूर करने के लिए होती है. ये मानसिक और वित्तीय समस्या बन सकती है, पर थेरपी, समर्थन और सावधानी से इलाज संभव है.

Published by sanskritij jaipuria

Shopping Addiction: आज के समय में लोगों के पास अपने लिए बिल्कुल भी समय नहीं होता है. तीस साल की नीरा अपने लिए समय निकालना ही भूल चुकी थी. नौकरी, परिवार और घर की जिम्मेदारियों के बीच वो अपनी पसंद, आराम और खुशी को भुला चुकी थी. वो अक्सर अकेलापन महसूस करती और अपने जीवन को सीमित महसूस करती.

लेकिन जैसे ही वीकेंड आता, नीरा मॉल जाती या ऑनलाइन सेल्स और डिस्काउंट्स की खोज में लग जाती. उसने अपने क्रेडिट कार्ड्स तक का पूरा इस्तेमाल कर लिया और ऐसे कपड़े खरीद लिए जिन्हें उसे वास्तव में जरूरत नहीं थी. वो नए कपड़े पहनकर एक दिन खुश होती, लेकिन अगले ही दिन नए डिजाइन के कपड़े खरीदने के लिए कार्ड स्वाइप कर देती. जब उसकी फाइनेंशियल हालात बिगड़ गए, तभी उसके परिवार ने महसूस किया कि नीरा को एक मानसिक समस्या है. नीरा को शॉपिंग एडिक्शन था, यानी खरीदारी की लत. ये गलत भावनाओं से बचने और आत्म-सम्मान पाने का तरीका बन गया था, ठीक वैसे ही जैसे कोई नशे की लत का अनुभव करता है.

शॉपाहोलिज्म क्या है?

शॉपाहोलिज्म को कम्पल्सिव बायिंग डिसऑर्डर भी कहा जाता है. ये स्थिति तब होती है जब कोई व्यक्ति बार-बार, अनियंत्रित रूप से, ऐसी चीजें खरीदता है जिनकी वास्तविक जरूरत नहीं होती और जो महंगी और समय लेने वाली होती हैं.

ये एक इम्पल्स-कंट्रोल डिसऑर्डर है और इसमें न्यूरोलॉजिकल और व्यवहारिक लक्षण नशे की अन्य लतों जैसे जुआ जैसी आदतों से मिलते-जुलते हैं.

शॉपाहोलिक व्यवहार को कैसे पहचानें?

किसी को बाहरी नजर से ये सिर्फ विलासिता या शौक लग सकता है. लेकिन वास्तविकता में, ये एक चक्र होता है. खरीदारी करना खुद वस्तु के लिए नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति को कंट्रोल करने के लिए होता है.

मस्तिष्क में क्या होता है?

शॉपिंग की लत मस्तिष्क के डोपामाइन-आधारित रिवार्ड सिस्टम को एक्टिव करती है, ठीक वैसे ही जैसे नशीली चीजें. अक्सर ये अन्य मानसिक बीमारियों जैसे चिंता, अवसाद, बाइपोलर या खाने की विकृतियों के साथ भी रहती है.

ये समस्या लंबे समय तक छिपी रह सकती है. परिवार या साथी को झूठ बोलने, खरीदारी छुपाने और कर्ज लेने जैसी स्थिति सामने आती है. लगातार शर्म महसूस होने से व्यक्ति सामाजिक रूप से अलग भी हो सकता है.

जब खरीदारी ही मेन तरीका बन जाता है तनाव और भावनाओं को कंट्रोल करने का, तो व्यक्ति अपने जीवन के अन्य दबावों से निपटने के स्वस्थ तरीके खो देता है, जिससे निराशा, असहायपन और कभी-कभी आत्महत्या के विचार तक आ सकते हैं.

Related Post

इलाज कैसे होता है?

शॉपिंग एडिक्शन का इलाज कई पहलुओं वाला होता है.

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरपी (CBT): ये थेरपी मरीज को उनके ट्रिगर्स (विचार और भावनाएं) पहचानने में मदद करती है और स्वस्थ व्यवहार सिखाती है.

दवाइयां: कुछ मामलों में चिकित्सक दवाइयों की सलाह भी देते हैं.

कुछ सरल कदम मदद कर सकते हैं

1. कोई भी खरीदारी करने से पहले दो दिन इंतजार करें.
2. रिटेल न्यूजलेटर और शॉपिंग ऐप्स हटाएं.
3. डिजिटल भुगतान के बजाय नकद का इस्तेमाल करें, ताकि खर्च का वास्तविक दर्द महसूस हो.

मदद कब लें?

आपको मदद की जरूरत तब हो सकती है जब:

 बार-बार खरीदारी का विचार आपके काम या सामाजिक जीवन में बाधा डालने लगे.
 खरीदारी मन की स्थिति सुधारने के लिए की जा रही हो, न कि वस्तु की वास्तविक जरूरत के लिए.
 खरीदारी के बाद तुरंत अपराधबोध या शर्म महसूस हो.
 खर्च कम करने की कोशिश विफल हो और खर्च छुपाने या झूठ बोलने की आदत पड़ जाए.
 खरीदी गई चीजों का उपयोग न हो और याद भी न रहे.
 अत्यधिक कर्ज या कानूनी समस्याएं उत्पन्न हों.

पहला कदम ये मानना है कि ये व्यवहार मदद की जरूरत का संकेत है. जब व्यक्ति अंदर की खाली जगह को समझने लगता है और केवल बाहर की चीजों से अपनी भावनाओं को भरना नहीं चाहता, तब वो अपनी आर्थिक स्वतंत्रता और मानसिक शांति फिर से पा सकता है.

sanskritij jaipuria
Published by sanskritij jaipuria

Recent Posts

बार-बार पेशाब जाना नॉर्मल या खतरे की घंटी, कहीं किडनी की समस्याओं का कोई संकेत तो नहीं?

Urine Problems: अगर पेशाब की आवृत्ति अचानक बढ़ जाए, रात में बार-बार उठना पड़े, या…

January 12, 2026

50 अंडे, 2 किलो चिकन, और… द ग्रेट खली की ज़बरदस्त डाइट और एक्रोमेगाली से उनकी लड़ाई की अनसुनी कहानी

Khali Diet: खली के लिए उनकी डाइट कोई लक्ज़री नहीं, बल्कि एक जरूरत थी. WWE…

January 12, 2026